Friday , 28 January 2022
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खगोल विद्वानों की देन है संचार क्रांति: नार्लीकर

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– अरविंद कुमार

वाराणसी। अंतरिक्ष को हम नजदीक से जितना भी देख रहे हैं, वह खगोल विज्ञान की देन है। खगोल विज्ञान के कारण ही अंतरिक्ष में विनाशकारी ग्रहों, उपग्रहों का पड़ताल कर उससे विश्व को संरक्षित करने के लिए वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं। खगोल विज्ञान के जरिए ही टिमटिमाते तारों की हर पल की गतिविधि तथा तारों की गणना हमें संरक्षित दिशा में ऋतुओं का आभास दिलाती है। प्रख्यात खगोल विद्वान, पद्भूषण प्रो. जयंत विष्णु नार्लीकर ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुणे विश्वविद्यालय के इमेरिटस, खगोल व भौतिकी विशेषज्ञ व लेखक प्रो. नार्लीकर ने कहा कि मौजूदा प्रत्येक मानव शरीर की रचना भी ब्रह्माण्ड जैसी ही है। ब्रह्माण्ड की प्रतिक्रिया भी मनुष्य के स्वभाव से जुड़ा है। 26 साल की उम्र में ही खगोल विज्ञान की उपलब्धियों की जानकारी पर पद्मविभूषण पाने वाले प्रो. नार्लीकर ने बताया कि अभी हाल तक आकाश में धूमकेतु का नाम सुनते ही बच्चे डरने लगाते थे। प्रत्येक 76 साल के बाद धूमकेतु दिखाई देता है। पिछली बार धूमकेतु 1976 में दिखाई दिया था। जिसे समाचार पत्रों ने प्रकाशित भी किया था। प्रो. नार्लीकर बीएचयू के खगोल विभाग की ओर से आयोजित सेमिनार में भाग लेने आए थे। उन्होंने बताया कि पांच तत्वों का अच्छा बुरा असर भी मनुष्य व जीव जंतु पर डालते हैं। प्रकृति की बसाई गई संरचना को संजोने की आज जरूरत है। उन्होंने कहा कि खगोल विज्ञान का प्रयोग प्राचीन काल में गणना कैलेंडर की तालिका बनाने के लिए होता था। इसकी मदद हम नक्षत्रों से लेते हैं। कृषि उत्पादन में भी ऋतुओं की स्पष्ट जानकारी जरूरी होती थी। धार्मिक कार्यों का पता भी ग्रह, नक्षत्रों और तारों को देखकर ही किया जाता है। उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि धार्मिक, सांस्कृतिक रीति-रिवाज कार्य करने के लिए आसमान में सितारों की चाल को देखकर ही पता चलता था। धार्मिक और मांगलिक कार्य के लिए आसमान में सितारों की चाल से वास्तविकता का पता लगाया जाता था। प्राचीन काल में समुद्र यात्रा के दौरान आसमान की हलचल व प्रतिक्रिया उसे देखकर ही होती थी। एलडी गेस्ट हाउस में जनसत्ता संवाददाता से बातचीत में खगोलविद् प्रो. नार्लीकर ने कहा कि न्यूटन के गुरुत्वागर्षण के सिद्धांत के ही बलबूते आज हम अंतरिक्ष में अपने उपग्रह स्थापित करने में समर्थ हो पाए हैं। यही वजह है कि संचार क्रांति में सभी अपने स्तर पर विख्यात दिख रहे हैं। उन्होंने बताया कि गणित के जरिए ही न्यूटन ने यह सिद्ध किया कि एक नियम नहीं बल्कि कई प्रयोगों के माध्यम से वैज्ञानिक सिद्धांत बनाया जाता है।

साभारः जनसत्ता

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