खुर पका बीमारी से बच सकेंगे मवेशी

खुर पका (फुट एंड माउथ डिजीज) मवेशियों में होने वाली ऐसी खतरनाक संक्रामकबीमारी है जो महामारी का रूप ले सकती है। भारत समेत दुनियाभर के कई देश इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं। इसका सबसे भयावह पहलू यह है कि इसकेसंक्रमण को रोकने के लिए भारी मात्रा में पशुओं की हत्या तक करनी पड़ जातीहै। मगर अब यह पशु संहार बीते दिनों की बात हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने यहसमझने में कामयाबी हासिल कर ली है कि इस बीमारी का वायरस कैसे फैलता है। गाय के खुर पका बीमारी से संक्रमित होने और इसके वायरस के दूसरे जानवर तक पहुंचने के समय के बीच के बिंदु पर वैज्ञानिकों को एक मौका मिला है।वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज का मतलब है कि संक्रमित पशुओं को खोजना संभव है और इससे पहले वह संक्रमण को फैलाएं उन्हें झुंड से अलग किया जा सकता है। यदि वायरस की पहचान का परीक्षण किया जा सके जो सस्ता होने के साथ-साथ किसान के इस्तेमाल के लिए काफी तेज भी हो, तो भारी मात्रा मेंपशुओं की हत्या किए बिना ही महामारी पर नियंत्रण किया जा सकता है। इडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मार्क वूलहाउस ने कहा, हमारे पर अब नए परीक्षणों को विकसित करने का अवसर है जिसके जरिए संक्रमित जानवरों को काफी पहले ही खोजा जा सकता है। इससे यह बीमारी फैल नहीं पाएगी। वर्ष 2001 में ब्रिटेन में इस कारण करीब एक करोड़ पशुओं को मौत के घाट उतारना पड़ा था, जिससे लगभग आठ अरब पौंड (करीब 600 अरब रुपये) का नुकसान हुआ था। इस अध्ययन को साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है। सरे में इंस्टीट्यूट फॉर एनिमल हेल्थ की एक शाखा पिरब्राइट लेबोरेटरी के शोधकर्ताओं ने यह सफलता हासिल की है। उन्होंने 2007 में अपेक्षाकृत छोटे और स्थानीय स्तर तक सीमित खुर पका बीमारी का अध्ययन शुरू किया कि यह कैसे फैलती है। दल ने अपने प्रयोग के दौरान एक स्वस्थ गाय को आठ घंटे तक ऐसी गाय के निकट रखा जिसे जानबूझ कर वायरस से संक्रमित किया गया था। संक्रमण के फैलने का पता लगाने के लिए ऊतकों के नमूनों की जांच की गई। वायरल जीन के परीक्षण ने दिखाया कि कब स्वस्थ जानवर संक्रमित हुआ और कब जानबूझ कर संक्रमित की गई गाय वायरस को दूसरे जानवर में संचारित करने के लायक हुई। दल ने पाया कि खुर पका बीमारी से संक्रमित गाय ने आधे दिन में ही बीमारी के पहले लक्षण दिखा दिए और सिर्फ 1.7 दिनों तक ही संक्रामक रही, जो पहले की सोच के मुकाबले आधा समय है। प्रोफेसर वूलहाउस ने कहा कि यहां अवसर की काफी छोटी खिड़की है, एक या दो दिन, जब हम बता सकते हैं कब गाय संक्रमित हुई मगर यह अन्य गायों के लिए संक्रामक नहीं है।

स्राेत : दैनिक जागरण

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