चित्रकूट में नानाजी का पुण्यस्मरण | स्पंदन फीचर्स
Tuesday , 17 May 2022
समाचार

चित्रकूट में नानाजी का पुण्यस्मरण

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नानाजी के 500 गांवों का नमूना देश के छःलाख गांवों का प्रेरणा स्रोत है -डॉ.ए.पी.जे.कलाम
नानाजी के नाम पर जबलपुर में खुलेगा पशुपालन विश्वविद्यालय

चित्रकूट से अनिल सौमित्र
चित्रकूट। नानाजी की प्रथम पुण्यतिथि पर चित्रकूट में देशभर से आए लोगों ने नानाजी को याद किया। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सहित अनेक राजनैतिक और सामाजिक हस्तियों ने उपस्थित होकर नानाजी का पुण्यस्मरण किया। इस अवसर पर अनेक संत-महात्मा और आचार्यगण भी उपस्थित थे। राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख की प्रथम पुण्यतिथि एवं वार्षिक श्राद्ध के अवसर पर स्वावलम्बन अभियान का लोकार्पण समारोह चित्रकूट में हुआ। इस आयोजन में आस-पास के 500 से भी अधिक गांवों और पूरे देशभर से लगभग 50 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर 31 समाज शिल्पी दम्पतियों का सम्मान और उपस्थित लोगों प्रत्येक घर के एक-एक पौधा भेंट किया गया। आयोजन की पूर्व संध्या पर श्रद्धांजलि अर्पण करने आये लोगों ने दीपयज्ञ कर नानाजी के प्रति अपनी भावना प्रकट की। नानाजी के वार्षिक श्राद्ध का परम्परागत कार्यक्रम 108 कुण्डीय यज्ञ के साथ प्रारम्भ हुआ। इस यज्ञ में स्वावलम्बन केन्दों से आये दम्पत्ति प्रमुख यजमान के रूप में सम्मलित हुए। इस स्वावलंबन अभियान का सम्पूर्ण दस्तावेज पूर्व राष्ट्रपति डॉं.ए.पी.जे.कलाम के द्वारा समाज के सम्मुख समर्पित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अब्दुल कलाम ने अपने उद्बोधन में कहा कि नानाजी के नेतृत्व में 500 गांव स्वावलम्बी बना है। इस मॉडल के मूलमंत्र को अन्य सभी क्षेत्रों में भी बताना है। उन्होने उपस्थित जन समुदाय से शपथ लेने की अपील करते हुए कहा कि कि भारत के हर ग्राम को समृद्ध बनाने के लिये चित्रकूट की उपलब्धियों को अन्य ग्रामों में भी फैलायें। इस कार्य में मेरा भी योगदान रहेगा। ऐसे नानाजी को मेरी श्रद्धांजलि है जिन्होंने चित्रकूट को एक नमूना बनाकर देश के सामने प्रस्तुत किया। यह नमूना देश के छह लाख ग्रामों के लिए प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने कहा कि मै जब भी नानाजी से मिला तो उनका ध्येय मुझे स्पष्ट दिखा। नानाजी ने अपने जीवनकाल में गांव के लोगों में, उन्हीं लोगों के सहयोग से स्वावलम्बन का सबेरा पैदा किया। आज गावों के स्वावलंबन के रूप में मैं नानाजी का ध्येय पूरा होते देख रहा हूं। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और वंचित वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने से अच्छी प्रशासनिक क्षमता विकसित हो सकती है। युवा पीढ़ी में आत्मनिर्भरता और उत्कृष्टता की भावना भरकर सामाजिक उत्थान और समृद्धि संभव है।
इस मौके पर दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक मदनदास देवी ने कहा कि सम्मान मिलना आसान काम है लेकिन समाज शिल्पी होना बहुत कठिन काम है। गांवों को विकसित करने का कार्य हुआ है तो वह समाज शिल्पी दम्पति के द्वारा ही हुआ है। हम सब भी इन समाज शिल्पी दम्पतियों की तरह योगदान देकर नानाजी के कार्य को भारत भर में फैलाने का का संकल्प लेगें तभी हम सच्चे मन से नानाजी को श्रद्धांजलि दे सकेगे।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चैहान ने अपने उद्बोधन में कहा कि अकेले सरकार देश और समाज का विकास नहीं कर सकती। समाज के बिना सरकार कुछ नहीं कर सकती। गांव कैसे स्वावलम्बी बने इसके लिये हमने नानाजी की पे्ररणा से ‘‘आओ बनायें अपना मध्यप्रदेश अभियान’’ चलाया था। नानाजी जो चाहते थे उस दिशा में हमने शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ कृषि के क्षेत्र में भी सुधार किया है। श्री चैहान ने कहा कि नानाजी ने जो रास्ता हमें दिखाया है उस रास्ते पर प्रदेश सरकार चलकर नानाजी के शेष कार्यो को पूर्ण करने में पूरे मनोयोग से लगेगी। मुख्यमंत्री ने उद्यमिता विकास के लिए पूरे प्रदेश के हर विकासखंड में कौशल विकास केन्द्र और जबलपुर में नानाजी के नाम पर पशुपालन विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नानाजी को आज मेरी ओर से यही श्रद्धांजलि है।
कार्यक्रम में दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डॉ. भरत पाठक ने स्वावलम्बन अभियान की भूमिका रखते हुए कहा कि मा नानाजी ने राजनीति को तिलांजलि देकर समाजनीति को अपनाया। उन्होंने दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना कर समाज का कार्य समाज के सहयोग से करने का संकल्प लिया। दीनदयाल शोध संस्थान ने राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख के सानिध्य में समाज जीवन के सभी पहलुओं पर प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट क्षेत्र के 50 किमी. की परिधि में आने वाले 500 से भी अधिक ग्राम आवादियों में ग्रामवासियों की पहल एवं पुरुषार्थ के आधार पर सामूहिक प्रयत्न से स्वावलम्बन अभियान का शुभारम्भ 26 जनवरी 2002 से किया। 108 ग्रामीण केन्द्रों के माध्यम से 500 गांवों में स्वावलम्बन अभियान की रूपरेखा तैयार हुई थी।
डॉ. पाठक ने कहा कि संस्थान को किसी विश्व बैंक या अन्तरराष्ट्रीय एजेंसी का कोई धन नहीं चाहिये। संस्थान जो भी करेगा अपने बलबूते करेगा। डॉ. पाठक ने उपस्थित लोगों को बताया कि डॉ. कलाम साहब ने 2005 में यहां 80 स्वावलम्बी गांवों को देखा था, वे आज 500 गांवों के स्वावलम्बन के साक्षी बने हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के 4800 से भी अधिक परिवारों में जो कार्य हुआ है वह आज लोकार्पित इस ‘‘द रोड टू सेल्फरिलायंस’ में दर्ज है। दीनदयाल शोध संस्थान की संकल्पना के आधार पर मध्यप्रदेश के सतना जिले और उत्तरप्रदेश के चित्रकूट जनपद के 500 से भी अधिक गांव में गरीबी, अशिक्षा, बेराजगारी और परावलंबन खत्म हुआ है। आज इन गांवों में स्वावलम्बन के साथ ही शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विकास दिखता है। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने स्वावलम्बन अभियान के संकल्प का वाचन किया गया। जयप्रभा तकनीकी अनुसंधान केन्द्र की निदेशक डॉ.नंदिता पाठक ने कार्यक्रम का संचालन किया।
इस समारोह में अतिथि के रूप में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, दीनदयाल शोध संस्थान के संरक्षक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख मदनदास देवी, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान, आचार्य आश्रम चित्रकूट के महंत पूज्य राजगुरू संकर्षण प्रपन्नाचार्य जी महाराज, दीनदयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेन्द्रजीत सिंह, राज्यसभा सदस्य और मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष प्रभात झा, श्रीमती तरला जोशी वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग, दीनदयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष “ांकर प्रसाद ताम्रकार, श्री प्रभाकरराव मुण्डले तथा मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनीस, ऊर्जा एवं खनिज मंत्री राजेन्द्र शुक्ला, कृषि मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, लोकनिर्माण मंत्री नागेन्द्र सिंह नागोद, सांसद श्री गणेश सिंह उपस्थित थे।

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