Tuesday , 29 September 2020
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ज्ञान, शील और एकता के बल पर भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा : डॉ. मोहन भागवत

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भोपाल में विद्यार्थी परिषद् के कार्यालय छात्र-शक्ति का लोकार्पण

भोपाल। 28 मार्च को भोपाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यालय भवन ‘‘छात्र-शक्ति’’ का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत ने कहा कि अपना देश भारत ज्ञान, शील और एकता के आधार पर दुनिया का नेतृत्व करेगा। विद्यार्थी परिषद् ज्ञान, शील और एकता के आधार पर ही काम करती है। इसमें शील ही हिन्दुत्व है। यही हमारे जीवन का आधार है। हमें इसका सदैव स्मरण रखना चाहिए। हमें ज्ञान और एकता भी चाहिए। एकता की कमी के कारण हम 1500 वर्षों तक लगातार लुटते-पिटते रहे। एकता की कमी के कारण झगड़े होते हैं। झगड़े होते हैं तो वोट बंटते हैं। वोट का लाभ चाहने वाले समाज की एकता खत्म करना चाहते हैंं। लेकिन अगर दुनिया को दिशा देना है तो हमें शक्ति सम्पन्न बनकर दुनिया में खड़ा होना पड़ेगा। डॉ. भागवत ने जोर देकर कहा कि शील के अभाव में हमारे भीतर से तेज, बल और वैभव सब चला जाता है। इसलिए हमें अपने और समाज के भीतर शील का संरक्षण करना है। हमें मूल तत्व शील को अक्षुण्ण रखना होगा तभी हम अपने ध्येय को प्राप्त कर सकेंगे।
संघ प्रमुख ने विद्यार्थियों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया आज भारत की ओर आस लगाकर देख रही है। दुनिया को भारत की भारतीयता, उसका हिन्दुत्व चाहिए। लकिन हम कमजोर स्थिति लेकर दुनिया में खड़े नहीं हो सकते। ंआज देश की हालत ठीक नहीं है। स्वतंत्र देश में भी सरकार से संघर्ष और आंदोलन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि हम तत्व की बात तो करते हैं, लेकिन व्यवहार नहीं करते। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद् के जिस कुल के हैं वहां तत्व और व्यवहार को अलग करके नहीं देखा जाता। हम अपने आचरण से तत्व को अभिव्यक्त करें।

इस अवसर पर संघ के सरसंघचालक ने गांधी और विनोबा का स्मरण करते हुए कहा कि आज गांधी से बड़ा उनका नाम हो गया है। ऐसा कई महापुरुषों के साथ हुआ है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी बनने से कोई फायदा नहीं। अब गांधी ही बनना पड़ेगा। गांधी जी ने जीवनपर्यन्त तत्व का पालन किया। गांधी जी के विचार उनके आचरण का अनुसरण करते थे। भ्रष्टाचार पर टिप्पणी करते हुए संघ के सरसंघचालक ने कहा कि नित्य नए घोटाले सामने

छात्र शक्ति भवन लोकापर्ण में सभा को सम्बोधित करते हुए मोहन भागवत

आ रहे हैं। लेकिन पहले तो घोटाले स्वीकार नहीं किए जाते। प्रमाण मिल जाने पर यह कहा जाता है कि इसमें हम शामिल नहीं हैं। काफी ना-नूकुर के बाद जब जांच समिति गठित होती है, तब तक दोषी बचने का रास्ता ढूंढ लेता है। उन्होंने भ्रष्टाचार के लिए सुशिक्षित और आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न लोगों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचारियों पर नियंत्रण नहीं है, इसलिए भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। संघ प्रमुख ने कहा कि मनुष्य के ज्ञान की दिशा ठीक हो तो भ्रष्टाचार नहीं होगा।
जापान की प्रगति का उदाहरण देते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि वहां के लोग देशभक्त हैं। देश के लिए जीते हैं। वे अनुशासन का पालन करते हैं। अकेले के विकास की बजाए अपने आस-पास, अपने गांव और पूरे देश के विकास के बारे में सोचते हैं। जापान की आर्थिक समृद्धि की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से ही जापान दुनिया में आर्थिक क्षेत्र का सिरमौर है। जापान के बारे में अर्थशास्त्रियों और समाजशास्त्रियों के अध्ययन निष्कर्षों का हवाला देते हुए उन्होनें बताया कि जापान की प्रगति में  देशभक्ति, अनुशासन, स्वयं के साथ परिवेश का विकास करेन की भावना, परिश्रमशीलता और उत्कृष्ट गुणवत्ता की महती भूमिका है।
उन्होंने कहा कि हम जो कुछ भी हैं उसमें हमारा अपना क्या है, हमारे जीवन में अकेले नहीं बल्कि माता-पिता, परिवार-परिवेश, गुरूजन सभी का योगदान होता है और इस योगदान को हमें वापस लौटाना होता है। इसलिए भारतीय संस्कृति में समाजऋण, पितृऋण, गुरूऋण की बात कही गई है। डॉ. भागवत ने विद्यार्थी परिषद् के वर्तमान एवं पूर्व कार्यकर्ताओं के साथ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज से कुछ दशक पहले शिक्षा का उद्देश्य दूसरों का उपकार करना होता था। लेकिन आज शिक्षा व्यापार के लिए दी जा रही है। भारत को शक्ति सम्पन्न और वैभव सम्पन्न बनाने के लिए हम सभी को अपनी दिशा तय करनी होगी।
इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा कि शिक्षा का व्यावसायीकरण रोकने के लिए सरकार प्रयासरत है। जल्द ही इसके लिए कानून बनाया जायेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अपने आवास पर ‘‘छात्र पंचायत’’ आयोजित करने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन के आदर्श स्वरुप के लिए कार्यकर्ता, कार्यक्रम, कोष और कार्यालय का होना जरूरी है। परिषद् के कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने जो गुण अर्जित किए वही आज उनके लिए मार्गदर्शक का काम कर रहे हैं। श्री चौहान ने कहा कि कार्यकर्ताओं को गुटबाजी से दूर रहकर, विनम्र, धैर्यवान, उत्साही और निर्विकार होना चाहिए। छात्र-शक्ति भवन के लोकार्पण अवसर पर परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलिंद सराठे, पूर्व अध्यक्ष राजकुमार भाटिया, राष्ट्रीय महामंत्री उमेशदत्त शर्मा, संगठन मंत्री सुनील अंबेबर, क्षेत्रीय संगठन मंत्री विष्णुदत्त शर्मा, प्रदेश मंत्री भारती कुम्हारे आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संघ और भाजपा के अधिकरी भी उपस्थित थे। संघ के निवर्तमान सरसंघचालक कुप् सी सुदर्शन, क्षेत्र संघचालक श्रीकृष्ण माहेश्वरी, प्रांत संघचालक शशिभाई सेठ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा, संगठन महामंत्री अरविंद मेनन, पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा, बाबूलाल गौर सहित सरकार के अनेक मंत्री उपस्थित थे।

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