Wednesday , 5 August 2020
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दमे से जूझ रहे पिता के लिए बनाया नेबुलाइजर

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बीbpl-R2631314-smallकानेर के छतरगढ़ तहसील का एक गांव है, तीन-केडब्लूएसएम। यहां रहने वाले सुभाष ने साइकिल पंप से नेबुलाइजेशन की यह सस्ती तकनीक ईजाद की है। उसके पिता मनीराम को एक बार अस्थमा का दौरा पड़ा था। रात के वक्त गांव से शहर के अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल था। उसे डॉक्टर ने बताया था कि ऐसी हालत में भाप बनाने वाली मशीन में दवा डालकर मरीज के फेफड़ों तक पहुंचाना जरूरी होता है। इसके लिए उसके पास मास्क था पर नेबुलाइजर नहीं था। लिहाजा, दिमाग दौड़ाया और साइकिल पंप से मास्क को जोड़ दिया। मनीराम की सांसें सध गईं। और अब कई जरूरतमंदों की भी सध रही हैं।  महज 80 रुपए का साइकिल पंप इंसानी फेफड़ों में जिंदगी भरने के काम भी आ सकता है। बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से जुड़े टीबी अस्पताल श्वसन रोग विभाग  के ‘यू’ वार्ड में कई मरीजों के मुंह पर मास्क लगा दिखता है। जो साइकिल पंप से जुड़ा होता है। और बगल में खड़ा अटेंडेंट या रिश्तेदार इस पंप को चलाते दिखता है। इसके जरिए थोड़ी-थोड़ी हवा मास्क में पहुंचती है और मास्क में भरी दमा की दवाई आहिस्ता-आहिस्ता भाप बनकर मरीज के फेफड़े में। इस कवायद को डॉक्टरी भाषा में नेबुलाइजेशन कहते हैं। अस्पताल के रेस्पिरेटरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. मानक गुजरानी के मुताबिक, ‘यह मेडिकल डिवाइस तो नहीं है। पर काम अच्छा कर रही है। हम इसे मरीजों को सजेस्ट भी कर रहे हैं। वहीं, डॉ. गुंजन सोनी कहते हैं, ‘इस पर और शोध की जरूरत है। इसके लिए हम नेबुलाइजर बनाने वाली कंपनियों से बात करेंगे।’  महज डेढ़ सौ रुपए के खर्च में होने वाला नेबुलाइजेशन! क्योंकि बड़ी कंपनियों के नेबुलाइजर तो दो-ढाई हजार से कम के नहीं आते। उनके साथ ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत भी होती है, उसका खर्च अलग।

साभार: दैनिक भास्कर

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