दोहे | स्पंदन फीचर्स
Tuesday , 17 May 2022
समाचार

दोहे

Spread the love

-निदा फाजली
सीधा सादा डाकिया, जादू करे महान;
एक ही थैले में भरे, आंसू और मुस्कान।

सुना है अपने गांव में, रहा न अब वो नीम;
जिसके आगे मांद थे, सारे बैद- हकीम।

बूढ़ा पीपल घाट का, बतियाए दिन-रात;
जो भी गुजरे पास से,सर पर रख दे हाथ।

चीखे घर के द्वार की लकड़ी हर बरसात;
कटकर भी मरते नहीं, पेड़ों के दिन रात।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)