Thursday , 6 August 2020
समाचार

परंपरा-संस्कृति की रक्षा के लिए भाषा बचाना जरूरी

Spread the love

भोपाल। भाषा किसी भी संस्कृति की पहचान होती है। खासकर हमारी क्षेत्रीय भाष और बोलियों में तो सारी पंरपरा छिपी होती है। इनसे सभी की रक्षा के लिए भाषा को बचाना जरूरी है। इस आशय के विचार आज होटल अशोका में सुनाई दिए। यहां जनजातीय भाषाएं और शिक्षा पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। राज्य के आदिम जाति अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में देश भर के भाषाविद् और शिक्षा शास्त्री जुटे हैं।

संगोष्ठी की औपचारिक शुरुआत आदिमजाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह ने की। संगोष्ठी में दो दिनों तक करीब छी सत्रों में विद्वानों ने चर्चा की। अपने उद्बोधन में मंत्री विजय शाह ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और शिक्षा के विकास के लिए जरूरी है कि इसे प्राथमिक शिक्षा से जोड़ा जाए। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में बीते नौ वर्षों में बहुत कार्य किए हैं। फिर भी अभी और कार्य किए जाने की जरूरत है। संगोष्ठी के स्वागत भाषण में टीआरआई के संचालक के सुरेश ने बताया कि जनजातीय भाषाओं के विकास से आदिवासी क्षेत्रों में साक्षरता बढ़ेगी। शिक्षा में गुणात्मक सुधार होगा। उन्होंने आदिवासी बोलियों एवं भाषा के विकास एवं संरक्षण के परिदृश्य को प्रेजेंटेशन के माध्यम से प्रस्तुत किया। पूर्व आईएएस केके सेठी ने बताया कि सरकारी कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन में जनजातीय भाषा काफी कारगर होती है। संगोष्ठी को आवासीय आयुक्त मध्यप्रदेश भवन दिल्ली शैलेंद्र सिंह, पत्रकार गिरिजाशंकर, शिक्षाविद् डाॅ. भागीरथ कुमरावत एवं प्रोफेसर रमेश दवे ने भी संबोधित किया। संचालन लक्ष्मीनारायण पयोधि ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)