Tuesday , 29 September 2020
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प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से ही संतुलित विकास

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प्रदेश के संतुलित विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता है। विकास की योजना बनाते समय परिषद् द्वारा तैयार किये गये संसाधन एटलस का उपयोग किया जायेगा। विकास का अर्थ व्यापक है। इसमें सरकार और समाज दोनों को मिलकर भूमिका निभानी चाहिए। वास्तव में विकास वही है जिससे किसान, मजदूर, कारीगर और आम आदमी के जीवन में बदलाव आ सके। ये विचार विज्ञान भवन में 21 मई शनिवार को सायं 06.30 बजे म.प्र. संसाधन एटलस राज्य स्तरीय कार्यशाला के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान  ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि विकास के लिए योजना बनाना जरूरी है। विज्ञान के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों की सराहना चारों तरफ हो रही है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां पंचायत पद्धति विकसित की गई है। इस पद्धति से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है। समापन सत्र मेंराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के  सह सरकार्यवाह श्री सुरेश सोनी और  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा तीन जिलों के संसाधन एटलस और सागर जिले की मार्गदर्शिका का विमोचन भी किया गया। समापन समारोह में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि स्वर्णिम मध्यप्रदेश के सपने को साकार करने में एटलस महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस एटलस को विकास की जन्मपत्री कहा जा सकता है।

म.प्र. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के म.प्र.संसाधन एटलस कार्यक्रम के अन्तर्गत 21 मई 2013 मंगलवार को राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें कॉलेज प्राध्यापकों, अर्थशास्त्रियों, शोधार्थियों सहित प्रदेश के सभी जिलों के विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया ।

परिषद के विज्ञान भवन परिसर के सभागृह में प्रातः उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री बाबूलाल जैन, उपाध्यक्ष राज्य योजना आयोग ने कहा कि हम वातानुकूलित कमरों में बैठकर योजनाएं नहीं बनाते हैं। हम लोगों के बीच पहॅुचकर यह पूछते हैं कि विकास के लिये कैसी योजना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में सब कुछ है। प्रश्न यही है कि हम इसे कैसा बनाना चाहते हैं। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि एवं बीज वक्ता डॉ. बी.आर. पंचमुखी, कुलाधिपति श्रीगुरू सार्वभौम संस्कृत विद्यापीठ, मंत्रालयम, आंध्रप्रदेश ने कहा कि संस्कृत हमारी परम्परा में हैं और आज हम अपनी परम्पराओं से दूर होते जा रहे हैं । हमें अपनी परम्पराओं से जो ज्ञान मिला है, उससे हम दुनिया में आगे रह सकते हैं। वैश्वीकरण की बयार से हम विदेशी विचारों पर निर्भर होते जा रहे हैं, जिसमें ‘इंटेलेक्चयुल स्लेवरी’ कहा जा सकता है । उन्होंने कहा कि यह विचार सही नहीं है कि बाजारवाद से योजना आयोग जैसी संस्थाओं की जरूरत समाप्त हो गई है। वास्तव में सरकार और बाजार को अच्छी दिशा की ओर ले जाने में ‘योजना आयोग’ की अहम भूमिका है । उन्होंने विकास के विभिन्न प्रकारों का उल्लेख किया और कहा कि वास्तव में विकास वही है, जिसका लाभ सभी को मिले।

डॉ. वी.आर. पंचमुखी ने संसाधनों के संदर्भ में कहा कि हमारी आधुनिक जीवन शैली ने मांग को बढ़ा दिया है। हम पब्लिक ट्रांसपोर्ट को क्यों नहीं अपनाते। इतनी कारों की क्या आवश्यकता है? संयम आधारित जीवन शैली अपनाकर ही संसाधनों को बचाया जा सकता है। हम अपने मौलिक विचारों को अपनाकर ही पुनः विश्व गुरू बन सकते हैं। उद्घाटन सत्र में परिषद् के महानिदेशक प्रो. प्रमोद के. वर्मा ने कहा कि पूर्व में एटलस का उपयोग भौगोलिक जानकारियों तक सीमित था। अब इसका स्वरूप बदलता जा रहा है और विकास के लिए उपयोग हो रहा है। उन्होंने संसाधन एटलस तैयार करने में सहभागिता और अधिक से अधिक उपयोग करने पर बल दिया। डॉ. आर.के. मिश्रा, वरिष्ठ सलाहकार, राज्या योजना आयोग तथा, डॉ. एम.डी. श्रीनिवास, अध्यक्ष सी.पी.एस. चेन्नई एवं डॉ. जे.के. बजाज, निदेशक, सी.पी.एस. नई दिल्ली ने भी विचार व्यक्त किये। संसाधन वैज्ञानिक डॉ. आर.के. सिंह ने धन्यवाद एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप गोयल ने धन्यवाद उद्बोधन दिया।

प्रथम तकनीकी सत्र में सी.पी.एस., नई दिल्ली के निदेशक डॉ. जे.के. बजाज ने संसाधन एटलस ः मुख्य आयाम, कार्यशैली एवं उपयोगिता विषय पर व्याख्यान दिया। द्वितीय तकनीकी सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक डी.के. सोनी ने संसाधन एटलस ः प्राकृतिक संसाधनों का सर्वेक्षण एवं मानचित्रण तथा तृतीय तकनीकी सत्र में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप गोयल ने संसाधन एटलस ः बेवसाईट की जानकारियों का प्रस्तुतीकरण किया। समापन सत्र में एटलस का लोकार्पण किया गया। स्वागत उद्बोधन परिषद् के महानिदेशक प्रो. प्रमोद के वर्मा ने दिया। इस अवसर पर पुस्तक परिचय डॉ. जे.के. बजाज ने दिया।

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