Friday , 28 January 2022
समाचार

बच्चों में भी है सही-गलत की समझ

Spread the love
लंदन। अगर आप सोचते हैं कि शिशु सही और गलत के बारे में अहसास नहीं कर सकते, तो वैज्ञानिकों का एक नया शोध आपकी इस सोच को बदल सकता है। नए शोध के अनुसार नवजात भी सिर्फ प्रेम ही नहीं बल्कि भेदभाव, साम, दाम, दंड जैसे भावों को पहचानते हैं। इस शोध में दावा किया गया है कि 15 महीने तक के शिशु को भी इस बात का मूलभूत अहसास होता है कि क्या सही है और क्या गलत।
यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन के वैज्ञानिकों के इस शोध से पता चला है कि इतने छोटेच्बच्चे भी खाने-पीने की चीजों के समान-असमान वितरण में अंतर पता कर सकते हैं और समान वितरण नहीं होने पर आश्चर्य भी प्रकट करते हैं। डेली एक्सप्रेस में मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर जेसिका समरविले के हवाले से कहा गया है, हमारे शोध से पता चला है कि सही और गलत का ज्ञान शिशुओं को उससे भी कहीं तेजी से होता है, जितना हम सोचते थे। शोध के लिए शिशुओं को दूध और पटाखों के वितरण से जुड़ा एक वीडियो दिखाया गया। प्रो. जेसिका के मुताबिक, शिशुओं को बराबर के वितरण की आशा थी। उन्हें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि एक व्यक्ति को दूसरे से ज्यादा दूध या पटाखे दिए गए। बच्चों को शोध के दौरान दो तरह के खिलौने भी दिए गए। यह खास किस्म के खिलौने शिशुओं की प्रतिक्रियाएं देखने के लिए एक उचित उपकरण का काम कर रहे थे। नवजातों के समूह में एक तिहाई शिशु अपने प्रिय खिलौने दूसरे शिशुओं के साथ बांटने को तैयार थे। दूसरे एक तिहाई शिशु दूसरा खिलौना जो उन्हें पसंद नहीं था देने को राजी हुए। तीसरे एक तिहाई शिशु एक भी खिलौने देने को तैयार नहीं हुए। प्रोफेसर समरविले ने इस पर कहा कि जो शिशु दूध के समान वितरण को लेकर अधिक संवेदनशील थे उन्होंने राजी-खुशी तरीके से अपने पसंदीदा खिलौने दूसरों को खेलने को दिए। विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि जीवन के बहुत शुरू में ही शिशुओं के बीच वैक्तिगत मतभेद जैसे भाव उत्पन्न होने लग जाते हैं।

साभारः  दैनिक जागरण

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)