Friday , 28 January 2022
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बांझ बना सकता है लिव इन रिलेशन

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एजेंसी, नई दिल्ली। लिव इन रिलेशनशिप आपको जीवनभर के लिए बांझ बना सकता है। दिल्ली सहित मेट्रो शहरों में जिस तरह से लिव इन का ट्रेंड बढ़ता जा रहा है, महिलाओं खासकर कम उम्र की लड़कियों में इन्फर्टिलिटी का भी खतरा बढ़ रहा है।

इसका सबसे बड़ा कारण बन रहा है असुरक्षित गर्भपात। लंबे समय तक लिव इन में रहने और फिर गर्भपात से पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) यानी गर्भाशय, अंडाशय और दूसरे पेल्विक अंगों में संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है और इनसे जुड़ी नलियों के सामान्य टिशू आपस में चिपकने लगते हैं। इससे इन्फर्टिलिटी की समस्या पैदा हो जाती है। यह एक तरह का यौन रोग होता है, जो मल्टिपल सेक्स पार्टनर के अलावा गर्भपात की वजह से भी हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है इन्फर्टिलिटी को लेकर आने वाली महिलाओं में से ज्यादातर पहले गर्भपात करा चुकी होती हैं। पीआईडी से परेशान 20 पसर्ेंट महिलाएं इनफर्टिलिटी की शिकार हो जाती हैं। होता है बैक्टीरियल इन्फेक्शन : ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की स्त्री रोग विभाग और आईवीएफ सेंटर की हेड डॉ. सुनीता मित्तल का कहना है कि पीआईडी का मुख्य कारण एक बैक्टीरिया होता है, जो असुरक्षित गर्भपात की वजह से प्रजनन अंगों तक पहुंचता है। यही बैक्टीरिया सेक्सुअली ट्रांसमिटिड डिजीज के लिए भी जिम्मेदार होता है। इस बैक्टीरिया से गर्भाशय, ओवरी या दूसरे पेल्विक ऑर्गंस में इन्फेक्शन हो जाता है। यह आपस में चिपकने लगते हैं। यह एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। क्यों होती है इन्फर्टिलिटी : एक्सपर्ट्स का कहना है कि बैक्टीरिया की वजह से प्रजनन अंगों के सामान्य टिशू चिपचिपे हो जाते हैं। इसकी वजह से प्रजनन अंगों से जुड़ी नलियां ब्लॉक होने लगती हैं, जिसकी वजह से प्रेग्नेंसी मुश्किल हो जाती है। क्या हैं लक्षण : आईवीएफ ऐंड इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट डॉ. अर्चना बजाज का कहना है कि हालांकि इस बीमारी का कोई मुख्य लक्षण नहीं है, फिर भी इसमें प्रजनन अंगों में दर्द, अनियमित रक्तस्त्राव और लंबा बुखार बना रहता है। इन लक्षणों को आमतौर पर नजरअंदाज ही किया जाता है, लेकिन यह आगे चलकर गंभीर स्थिति पैदा कर देते हैं। डॉ. मित्तल का कहना है कि कभी कभी यह संक्रमण आंत और अपेंडिक्स तक पहुंचकर जानलेवा साबित होता है। सर गंगाराम अस्पताल की आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ. आभा मजुमदार का कहना है कि पीआईडी से पीडि़त महिलाओं में करीब 20 पसर्ेंट इनफर्टिलिटी का शिकार हो जाती हैं। इसके बैक्टीरिया प्रजनन अंगों और उसकी नलियों को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। उनका कहना है कि अगर इंफेक्शन का शुरू में ही पता चले तो ऐंटिबॉयोटिक थेरपी कारगर हो सकती है।

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