Friday , 28 January 2022
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बैल बनाएगा बिजली

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– ढूंढ निकाला बिजली बनाने का ईको फ्रेंडली तरीका

– भोपाल में ही बनी ईको-फ्रेंडली तकनीक

कोल्हू में बैल के गोल-गोल चक्कर लगाने से तेल निकालने की प्रक्रिया तो लगभग सभी ने देखी होगी, लेकिन क्या आपने कभी बैल को बिजली बनाते हुए देखा है। यह महज आश्चर्य करने की बात नहीं है, एक सच है जिसे साकार किया है 60 साल के बुजुर्ग मोहम्मद इकबाल सिद्दीकी ने। भोपाल में ही रहने वाले मोहम्मद सिद्दीकी पिछले 42 सालों से रोटेशन से बिजली बनाने की रिसर्च में जुटे थे, जिसका रिजल्ट अब ग्रामीण, शिक्षा, चक्र1, चक्र2 और पवन नाम के उपकरणों के रूप में सामने आया है। बिना गर्मी, बिना धुंए और बिना किसी फ्यूल से चलने वाले यह उपकरण इतने सक्षम हैं कि ये अनेकों ऐसे गांवों को रोशन कर सकते हैं, जहां बिजली आज तक नहीं पहुंची।
ग्रामीण बैल बनाएगा बिजली

कोल्हू की शक्ल का दिखाई देने वाला यह उपकरण ग्रामीण, दरअसल ऐसे ग्रामीणों के लिए ही बनाया गया है, जो अभी भी बिजली की व्यवस्था से वंचित हैं। बैल द्वारा किए जाने वाले मैकेनिकल वर्क इस उपकरण में ड्राइवेन फोर्स का काम करता है। इस उपकरण में यदि कोई बैल मात्र 3 घंटे की रोटेशन लेता है, तो इन तीन घंटों में इतनी बिजली पैदा हो जाती है कि गांव के 50 घरों में 3 से 5 घंटे तक दो सीएफएल चल सकते हैं। खास बात यह है कि मोहम्मद इकबाल द्वारा बनाई गई इस मशीन की दो साल तक जीरो मेंटिनेंस की टेस्टिंग की गई है। जिसमें देखा गया कि गर्मी की धूप, बरसात और कंपा देने वाली ठंड का इस उपकरण ग्रामीण पर कोई असर नहीं पड़ता।
ताकि ग्रामीण जीवन हो समस्या मुक्त

चक्र1, चक्र2 और प्रवाह तीन ऐसे इक्यूपमेंट हैं, जिनमें रोटेशन से बड़े पैमाने पर बिजली बनाई जा सकती है। प्रवाह एक बड़े पेंडुलम के आकार का उपकरण है, जो जब तक झूलता रहेगा, तब तक बिजली पैदा होती रहेगी। इस पेंडुलम को इस प्रकार बनाया गया है कि एक बार हल्का झटका देने से यह लगातार 3 घंटे तक झूलता रहता है। यदि यह पेंडुलम दिन में आठ घंटे भी घूमे तो कम से कम 12 घंटे के लिए 10 कमरों वाले एक हाॅस्पिटल में बिजली उपलब्ध कराई जा सकती है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से रिटायर हुए मोहम्मद इकबाल सिद्दीकी का सपना है कि वे देश के गांव वालों की जिंदगी रोशनी से भर दें। अभी कोई भी उपकरण उन्होंने मार्केट में नहीं उतारा है। मोहम्मद सिद्दीकी चाहते है कि वे इन उपकरणों को 26 जनवरी के दिन पूरे देश में इंट्रोड्यूज करें, ताकि लोगों को बिजली की समस्या से आजादी मिल सके। यह सारे उपकरण बुधवार को एनआईटीटीटीआर में चल रहे विंड एनर्जी सेमिनार में प्रदर्शनी के लिए आए थे। जिन पर हर किसी की निगाहें टिकी रह गईं।

शिक्षा से लैपटॉप भी चलेगा

पैर से चलने वाली सिलाई मशीन की तर्ज पर रोटेशन का इस्तेमाल कर मोहम्मद सिद्दीकी में शिक्षा का भी एक उपकरण तैयार किया है। जो वास्तव में एक ऐसा स्टडी टेबल है, जिसके बेस पर एक पैडल लगा हुआ है। पढ़ाई के दौरान अगर बच्चा शुरुआत में 15 मिनट और फिर थोड़े-थोड़े गैप पर पांच-पांच मिनट के लिए इस पैडल को चलाए तो उसे लगातार उसकी स्टडी टेबल पर लाइट मिलती रहेगी। इस टेबल के साथ में एक बैट्री भी फिक्स है, जो टेबल लैंप का इस्तेमाल न करने पर पैडलिंग से चार्ज हो जाएगी, ऐसे में आपको आधे घंटे की पैडलिंग पर करीब 5-7 घंटे के लिए स्टडी टेबल पर लाइन उपलब्ध हो सकती है। इस स्टडी टेबल में लगी बैट्री से स्टूडेंट्स अपना लैपटॉप और मोबाइल भी चार्ज कर सकते हैं।

साभारः दैनिक जारगण

 

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