Thursday , 6 August 2020
समाचार

भोपाल में दक्षिणपंथी बुद्धिजीवियों का जमावड़ा

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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 4 से 6 फरवरी तक बुद्धिजीवियों का जमावड़ा हो रहा है। देशभर के 29 प्रांतों के लगभग सौ से अधिक बुद्धिजीवी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। अपने को राष्ट्रवादी मानने वाले ये बौद्धिक लोग प्रज्ञा प्रवाह संगठन के बैनर तले इकट्ठा हो रहे है। दरअसल ये दक्षिणपंथी बुद्धिजीवी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक बंगलूर प्रो. पी.वी. कृष्ण भट्ट ने आज पत्रकारों को बताया कि प्रज्ञा प्रवाह वैचारिक कार्यों में लगे बुद्धिजीवियों का समन्वय है। इसमें राष्टीय विचारधारा से प्रेरित विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हैं। पत्रकार वार्ता में प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय सह-संयोजक राजेन्द्र चड्डा और मध्यभारत प्रांत के सह-सयोजक दीपक शर्मा भी उपस्थित थे।
प्रो. भट्ट के अनुसार इस सम्मेलन में उदीयमान भारत की वैश्विक भूमिका केन्द्रीय विषय होगा। लेकिन इसके साथ ही वर्तमान सांस्कृतिक और सभ्यतागत चुनौतियों, सतत विकास और पड़ोसी देशों में परिवर्तन के संदर्भ में भारत की भूमिका पर भी सम्मेलन में चर्चा होगी। गौरतलब है कि वर्तमान विश्व और स्वयं भारत भी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। इन परिवर्तनकारी परिस्थितियों में स्वयं को विकसित करना और विश्व को दिशा देने के लिए आवश्यक बौद्धिक प्रयास करना एक बड़ी चुनौती है। इस बौद्धिक जमावड़े में दक्षिणपंथी बुद्धिजीवी यह तय करने की कोशिश करेंगे कि किस प्रकार भारत विश्व का अनुकरण करने की बजाय नेतृत्व दे सके। आज विश्व दो धुवीय नहीं रहा। एक धु्रवीय विश्व में विकासशील और पिछड़े देश आत्म विस्मृति और मनोवैज्ञानिक संकट के दौर से गुजर रहे हैं। हालांकि भारत एक प्राचीन सभ्यता है, लेकिन यह भी अनेक आंतरिक समस्याओं से गुजर रहा है, ऐसे में इन संकटों और चुनौतियों में विश्व का नेतृत्व किस प्रकार कर सकता है।
प्रो. भट्ट ने बताया कि इस सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी और दत्तात्रेय होसबोल के साथ निवर्तमान सरसंघचालक कुप्.सी. सुदर्शन भी शामिल होंगे। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में भाजपा के उपाध्यक्ष बाल आप्टे, लेखक और स्तंभकार देवेन्द्र स्वरुप, डॉ. महेशचन्द्र शर्मा, प्रो. कुसुमलता केडिया, प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज, प्रो. बजरंगलाल गुप्त, स्वदेशी विचारक एस. गुरुमूर्ति, राममाधव, शेषाद्रीचारी, सांसद और पत्रकार चंदन मित्रा, रमेश पतंगे, शिक्षाविद् श्री मधुकर श्याम चतुर्वेदी, पूर्व कुलपति अवधेश कुमार सिंह, लेखक राकेश सिन्हा, डॉ. विनय सहस्बुद्धे, डॉ. जितेन्द्र कुमार बजाज, सुश्री इंदुमति काटगरे, सुश्री निवेदिता भिंडे, सुश्री सुषमा यादव और पूर्व राजदूत डी.बी. शेकटकर आदि प्रमुख रूप से उपस्थित होंगे।
प्रज्ञा प्रवाह के संयोजक के मुताबिक इस सम्मेलन में कई बौद्धिक संगठनों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। कर्नाटक के राष्ट्रोत्थान न्यास और मिथक सोसाइटी के साथ ही हैदराबाद के भारतीय विचार मंच, प्रज्ञा भारती, प्रबुद्ध भारती, वनबन्धु, कर्णावती के पुनरुत्थान ट्रस्ट, नई दिल्ली के सेंटर फॉर पॉलिसी स्टर्डीज व इंडिया फाउंडेशन, पंचनद संस्थान तथा विवेकानंद केन्द्र फाउंडेशन के प्रतिनिधि भी इसमें शरीक होंगे।
इस सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत 4 फरवरी को दोपहर बाद 4 बजे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान की उपस्थिति में होगी। 6 फरवरी को सायं 6 बजे रवीन्द्र भवन में सार्वजनिक रुप से इस सम्मेलन का समापन होगा।

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