Tuesday , 29 September 2020
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भौतिक विकास के बजाय मानव को आंतरिक प्रसन्नता की आवश्यकता :भूटान की राजकुमारी आशी सोनम

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द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय धर्म -धम्म सम्मलेन का शुभारम्भ 
PW_0131मानव के भौतिक विकास के आंकलन के बजाय भूटान में आंतरिक प्रसन्नता के आंकलन को तरजीह दी जाती है।  वर्त्तमान समय में दुनिया के लिए अंतर सम्बन्ध और जुड़ाव का है। मेहनत से ही जीवन को सफल बनाया जा सकता है।  भूटान में बुद्ध का दर्शन भाईचारे, परस्पर सम्बन्ध ,सुशासन के साथ ही सुखद अनुभूति प्रदान कर रहा है।  यह उदगार भूटान की राजकुमारी आशी सोनम डेकन वांगचुक ने साँची बौद्ध विश्व्विद्यालय द्वारा आयोजित द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय धर्म – धम्म सम्मलेन  में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये।  ।  उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि विश्व्विद्यालय के द्वारा हिन्दू बुद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए जो प्रयास किये जा रहे हैं उसके लिए भूटान के राजा, सरकार और जनता की और से शुभकामना है।  उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि धर्म और धम्म के उपदेश का पालन करके भारत और भूटान के सम्बन्ध और बेहतर होंगे।
 कार्यक्रम के अध्यक्ष के तौर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पूरी दुनिया में इन दिनों युद्ध, शोषण के भाव हैं।  दुनिया के कुछ देश दादागिरी  करने पर उतारू है। लेकिन जरुरत   इस बात की है कि लोग स्नेह , प्रेम , करुणा और दया के मार्ग पर चलें।  इस भाव को साँची विश्व्विद्यालय आगे बढ़ाएगा।  मुख्यमंत्री ने कहा कि भूटान और श्रीलंका जैसे मैत्री देशों के साथ संबंधों को और आगे बढ़ाने और मजबूत करने की आवश्यकता है।
 इस मौके पर श्रीलंका सरकार के वरिष्ठ मंत्री डॉक्टर शरथ अमुनुगामा मध्यप्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से खासे प्रभावित नजर आये।  उन्होंने कहा कि भारत और श्रीलंका के सम्बन्ध वर्षों पुराने हैं और मध्यप्रदेश सरकार इन सम्बन्धों को और भी मजबूती प्रदान कर रही है।  उन्होंने कहा कि जिस तरह साँची से जाकर सम्राट अशोक के पुत्र पुत्री महेंद्र और संघमित्रा ने  श्रीलंका में भगवान् बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार प्रसार किया ठीक उसी तरह साँची विश्व्विद्यालय भी शिक्षा के प्रचार प्रसार में महती भूमिका निभाएगा।
 साँची बौद्ध विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय धर्म -धम्म सम्मलेन का शुभारम्भ मध्यप्रदेश विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी परिषद् परिसर में संपन्न हुआ। इस मौके पर भूटान की राजकुमारी आशी सोनम डेकन वांगचुक बतौर मुख्य अतिथि और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बतौर अध्यक्ष शामिल हुए। कार्यक्रम में श्रीलंका , भूटान के वरिष्ठ मंत्रियों समेत लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
  अंतर्राष्ट्रीय धर्म – धम्म सम्मलेन का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
  इसके बाद पाली और संस्कृत भाषा में मंत्रोच्चारण के साथ ही कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने देश विदेश से आये विद्वानो प्रो लोकेश चन्द्र ,प्रो अंगराज चौधरी ,प्रो सागरमल जैन ,प्रो के रामकृष्ण राव का सम्मान किया।  स्वागत भाषण देते हुए साँची बौद्ध विश्व्विद्यालय के चांसलर प्रोफ़ेसर सामदोंग रिम्पोचे ने कहा कि हिन्दू बुद्ध परंपरा और इसका आपसी तालमेल सैकड़ों वर्ष पुराना है।  यह गर्व का विषय है कि सैकड़ों वर्ष पुरानी इस परंपरा को साँची विश्वविद्यालय द्वारा न केवल आगे बढ़ाया जायेगा बल्कि नये आयाम ) दिए जायेंगे। विश्व्विद्यालय में बाकी शिक्षण संस्थानो में  पढ़ाये जाने वाले पाठ्यक्रमो से हटकर पढाई होगी।  इस मौके पर विश्व्विद्यालय की पाठ्यक्रम पुस्तिका का विमोचन आशिन नयनिसारा (म्यांमार) द्वारा किया गया। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा प्रमुख रूप से मौजूद रहे।  कार्यक्रम के अंत में विश्व्विद्यालय के कार्यकारी  अधिकारी राजेश गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। सञ्चालन कुलपति डॉक्टर शशि प्रभा कुमार ने किया।
 उद्घाटन सत्र के बाद हुए व्याख्यान सत्रों में प्रोफ़ेसर कपिल कपूर (जेएनयू दिल्ली ) , लाइनोपो दोरजी चोडन (मंत्री भूटान ), डॉक्टर सरथ अमुनुगामा (मंत्री श्रीलंका) ,वेन अशिन नयननिसारा (चांसलर सीतागु इंटरनेशनल बुद्धिस्ट एकेडमिकस) , डॉक्टर लोकेश चंद्रा (डायरेक्टर इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ़ इंडियन कल्चर दिल्ली ), डॉक्टर डेविड फ्रोले (संस्थापक इंस्टिट्यूट ऑफ़ वैदिक स्टडीज अमेरिका ) ,डॉक्टर ए वी राजगोपालन (डीन टीएपीएमईई मणिपाल ) , रेव डॉक्टर सुमना श्री (बुद्धिस्ट चीफ ऑफ़ मलेशिया ,सिंगापूर ),पूज्य स्वामी आत्मप्रिय नंदा (कुलपति आर के मिशन पश्चिम बंगाल ), प्रोफ़ेसर थिचनाहट टु(डिप्टी रेक्टर ऑफ़ विएतनाम बुद्धिस्ट युनिवेर्सिटी ) के सम्बोधन हुए।
रविवार को सायं 5 :30  बजे सम्मलेन का समापन होगा। समापन कार्यक्रम में मध्यप्रदेश शासन के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सुरेन्द्र पटवा मुख्यअतिथि होंगे।  इसके पूर्व पूरे दिन तकनीकी चर्चा सत्र होंगे जिसमें विभिन्न विद्वानों के शोध पत्र प्रस्तुत किये जायेंगे।

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