Friday , 28 January 2022
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मनोरोग इलाज पर ज्यादातर देश नहीं दे रहे ध्यान:डब्ल्यूएचओ

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नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि दुनिया के ज्यादातर देश अब भी मनोरोग मामले में सुस्त रवैया अपनाए हुए हैं। ज्यादातर देशों के स्वास्थ्य संसाधनों के लिए आवंटित राशि में से दो फीसदी भी मानसिक रोगों के इलाज पर खर्च नहीं होता। ‘मेंटल हेल्थ एटलस-2011’ के ताजा रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि अभी भी विश्व में ज्यादातर मानसिक रोगियों को चिकित्सा सुविधा मुहैया नहीं हो पा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार पूरी दुनिया में प्रति मानसिक रोगी के ऊपर सौ रुपए से भी कम खर्च हो रहे हैं। कम आय वाले देशों में मानसिक रोगियों की स्थिति और भी खराब है। इन देशों में प्रति मानसिक रोगी पर दस रुपए तक खर्च नहीं किया जाता। रिपोर्ट के अनुसार मानसिक रोगों का इलाज करने वाले डाक्टरों की भी भारी कमी है। ज्यादातर देशों में प्रति दो लाख व्यक्तियों में सिर्फ एक मनोचिकित्सक ही उपलब्ध है।
डब्ल्यूएचओ की गैर-संक्रामक रोगों की उप महानिदेशक डा. आला अलवन का कहना है ‘अभी भी ज्यादातर देश मनोरोग इलाज के नाम पर 70 फीसदी पैसा मानसिक रोगियों पर काम कर रहे संस्थानों को दे रहे हैं। इसके उलट ज्यादातर पैसा प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों को सीधे दिया जाना चाहिए जहां मानसिक रोगियों का सीधा इलाज हो सके।’ डॉ. आला ने बताया कि मानसिक रोगियों के इलाज में हमेशा लंबा समय लगता है। इसके लिए सभी देशों को मानसिक चिकित्सा के लिए अलग से पैसे आवंटित करने की जरूरत है।

रिपोर्ट में लिखा है ‘दक्षिण-पूर्व एशिया में 70 फीसदी देशों में मनोरोग नीति बनाई गई है। लेकिन इस क्षेत्र में सिर्फ 32 फीसदी आबादी ही इसका फायदा उठा पा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण भारत है, जहां दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे ज्यादा आबादी रहती है, लेकिन मानसिक रोगों को लेकर कोई नीति नहीं बनाई गई है।’

साभारः दैनिक भास्कर

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