Friday , 28 January 2022
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रद्दी कागज से रोकी जा रही है मिथेन

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भोपाल। पृथ्वी के तापमान में वृद्धि के लिए मौजूदा खतरों के लिए घातक मिथेन को जिम्मेदार माना जाता है। इसके प्रभाव दृष्प्रभाव को कम करने के लिए मध्यप्रदेश की राजधानी में एक अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। यहां दफ्तरों से रोज निकलने वाली कागजी कचरे को फिर से स्टेशनरी में बदलने का काम शुरु हुआ है। भोपाल के पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को) अपने रिसाइकिलिंग प्लांट में इसे अंजाम दे रहा है। यहां से तैयार स्टेशनरी पर्यावरण परिसर के सभी दफ्तरों को उपलब्ध कराया जा रहा है। इस प्रकार की स्टेशनरी का अधिक उत्पादन होने पर अन्य सरकारी कार्यालयों को भी आपूर्ति की जायेगी। उल्लेखनीय है कि कागजी रद्दी को नई शक्ल में तब्दील करने के पीछे स्टेशनरी को किफायती बनाने के साथ ही पर्यावरण सुधारे जाने का मकसद भी है। यह जानना यकीनन आश्चर्यजनक है कि कागजी कचरा पर्यावरण में घुलकर मिथेन जैसी जहरीली गैस पैदा करता है। इसे कार्बन डाई-आॅक्साइड से 21 गुना ज्यादा घातक माना गया है। भोपाल में एप्को की इस पहल का दूसरा लाभ यह है कि सरकारी कार्यालयों को वहीं की रद्दी से अपने उपयोग के लिए साफ और स्वच्छ कागज के रूप में स्टेशनरी प्राप्त हो रही है। इस स्टेशनरी में फाइल, कवर फाइल, राइटिंग पैड, लिफाफे, कांफ्रेंस कोल्डर्स, लिखने के लिए चिटपैड, लेटरहेड, विजिटिंग कार्ड और ग्रीटिंगस कार्ड की सामग्री प्राप्त हो रही है। गौरतलब है इस प्रक्रिया में रद्दी के रिसाइकिलिंग के लिए किसी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं किया जा रहा है।

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