सही वैश्विककरण से सशक्त होगा भारत

धर्मपाल शोधपीठ और स्पंदन का आयोजन

भोपाल, 17 फरवरी कमजोर सरकार देश को खोखला कर रही है। यदि देशभक्त और जागरूक लोग सत्ता में पहुँचे तभी भारत को शक्ति सम्पन्न बनाने की दिशा में इस देश में सही वैश्विक करण लागू किया जा सकेगा। आज देश को युरण्ड पंथियों और अमेरिका के बढ़ते प्रभाव से बचाय जाने की जरूरत है। वर्तमान में जो परिस्थितियां हैं, ऐसे में राष्ट्रभक्तों को हर कार्य को जिम्मेवारी के साथ अपने कंधों पर लेने की जरूरत है। उक्त उद्गार राजधानी के टीटीटीआई सभागार में  धर्मपाल शोधपीठ और स्वयंसेवी संस्था स्पंदन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रथम वक्ता के रूप में विषय प्रर्वतन करते हुए महात्मा गांधी शोध संस्थान वाराणसी की निदेशिका जानी-मानी अर्थशास्त्री प्रो. कुसुमलता केडिया ने वक्त किए।  इस अवसर पर राष्ट्रवादी चिंतक और प्रख्यात विचारक के.एन गोविंदाचार्य, धारावाहिक और अनेक फिल्मों के निर्माता-निर्देशक डॉ.चन्द्रप्रकाश द्विवेदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यक्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर और धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज ने ‘वैश्वीकरण के राजनैतिक और सामाजिक’ विषय पर अपने विचार रखे।

IMG_1410युरो-अमेरिकन अवधारणाएं भ्रामक

उन्होंने  कहा कि भारत की युवा पीढ़ी पर पश्चिम का प्रभाव तेजी से देखा जा रहा है, खासतौर से पढ़ा-लिखा वर्ग भी तेजी से युरोप की आधनिक विचारधाराओं की गिरफत में आ रहा है। यह इसलिए भी है,क्यों कि शिक्षा देने और लेने के स्तर पर हमनें युरोपिय व्यवस्था को आत्मसात कर लिया है। आज यह व्यवस्था हमें वैचारिकी के स्तर पर देखें तो कमजोर ही बना रही है। प्रो. केडिया ने युरो-अमेरिका की अवधारणाओं को पूरी तरह भ्रामक करार दिया। उनका कहना था कि कब तक हम इस जूठे कंसप्ट को ढोते रहेंगे ? आज जरूरत सभी भारतीयों को इसके प्रभाव से बचे रहने की है।

ग्लोबलाइजेशन बहुराष्ट्रीय कंपनियों का प्रचार : प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज

राष्ट्रीय संगोष्ठी में विषय प्रवेश करते हुए धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज ने कहा कि ग्लोबलाइजेशन यह शब्द बहुराष्ट्रीय कंपनियों का भ्रामक प्रचार है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में मनमानी करने के लिए खूली छूट चाहिए इसलिए उन्होंने इस शब्द का भ्रामक जाल बुना है।

ग्लोबलाइजेशन कंपनियों को लूट की छूट देने वाली संरचना है, यह चमत्कृत कर कंपनी के संरक्षकों को भी संरक्षण प्रदान करने वाली व्यवस्था है, कई बार देशभक्त भारतीय भी इसके जाल में आ जाते हैं, ऐसे में आज जरूरत भारत के सशक्तिकरण के लिए सभी भारतीयों को इससे बचे रहने या इसके षड्यंत्रों से होशियार रहने की है।

भारत की राजनैतिक पाॢटयां विश्व बाजार के प्रभाव में : केएन गोविंदाचार्य
किया जा रहा भारतीय अर्थव्यवस्था का विनाश

देश के प्रसिद्ध सामाजिक चिंतक और विचारक व भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय नेता,राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन के संयोजक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि आज कई तरीकों से भारतीय अर्थ व्यवस्था का विनाश किया जा रहा है। सरकारों का इस और जरा भी ध्यान नहीं है कि विकास में पीछे छूट चुके व्यक्ति के हित में पूर्ण योजनाएं किस तरह बनाई जायें ? उन्होंने कहा कि गरीब परस्त और भारत परस्त नितियाँ हों तो जरूर भारतीय अर्थ व्यवस्था सुदृढ़ होगी।

गोविन्दाचार्य ने इस अवसर पर विश्व बाजार के तथ्य भी प्रस्तुत किए। वहीं उनका यह भी कहना था कि भारत की सभी राजनैतिक पाॢटयां आज वैश्विक बाजार के दवाब और प्रभाव में हैं, जिन्हें इस विश्व बाजार के प्रभाव से मुक्त कराना हम सभी भारतीयों की जिम्मेवारी है।

वैश्वीकरण के नाम पर भारतीय संस्कृति-कला-विचार जगत में पतनशील भावों और लालसाओं को मिल रहा है बढ़ावा : डॉ.चन्द्रप्रकाश द्विवेदी

वहीं इस अवसर पर पहुंचे धारावाहिक और अनेक फिल्मों के निर्माता निर्देंशक डॉ.चन्द्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि वैश्वीकरण के नाम पर भारतीय संस्कृति कला और विचार जगत में पतनशील विचारों, भावों और लालसाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित किया जाकर उन्हें समझाने का उपक्रम चलाया जाना चाहिए। उन्होंने आव्हान किया कि देशभर से लोगों को इसके विरूद्ध सृजन स्तर पर कार्य करना होगा,तभी आने वाले समय में एक सशक्त, समर्थ और शक्तिशाली भारत का निर्माण किया जा सकता है।

वैश्वीकरण क बनाम, भारतीय समाज को किया जा रहा खोखला : रामदत्त चक्रधर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यक्षेत्र प्रचारक रामदत्त चक्रधर ने ‘वैश्वीकरण के राजनैतिक और सामाजिक’ विषय पर  दिए अपने संवाद में कहा कि वैश्वीकरण के नाम पर आज भारतीय समाज को खोखला बनाने की व्यवस्थित कार्यवाहियां की जा रही हैं, जिसे रोका जाना चाहिए। इसके लिए आज देश के सभी नागरिकों को आगे आने की जरूरत है। समाज जागरण और राष्ट्र जागरण किए बिना यह संभव नहीं है। इस कार्य को आज हम सभी प्रबुद्ध लोगों द्वारा किए जाने की महती आवश्यकता है।

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