Thursday , 6 August 2020
समाचार

“साजिश” के खिलाफ संघ की आक्रामक तैयारी

Spread the love

राजस्थान।पुत्तूर। हिंदू आतंकवाद नाम से गढ़े गए नए राजनीतिक शब्द का दर्द महसूस कर रहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इसकी दवा की खोज में जुट गया है। जम्मू-कश्मीर समस्या, आतंकवाद, कालाधन व भ्रष्टाचार जैसे ज्वलंत मुद्दे हवा मेें तैरने के बावजूद संघ की छवि धूमिल करने के कथित प्रयास में केंद्र सरकार व कांग्रेस की सफलता से निपटने के लिए संघ आक्रामक होने की तैयारी में है।

यहां शुक्रवार को विवेकानंद इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में शुरू संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के तीन दिवसीय चिंतन शिविर में सरसंघ चालक मोहन भागवत ने यह कहकर कि गुरू जी गोलवलकर कहते थे कि आज का विश्व केवल शक्ति की भाषा समझता है और अपरिमित शक्ति हासिल करके ही राष्ट्र का उत्थान संभव है, संघ की भावी रणनीति का संकेत दिया।

भागवत ने आह्वान किया कि आज की राजनीतिक व सामाजिक परिस्थितियों की समीक्षा के साथ संघ को अपने कार्य की शक्ति व गति बढ़ानी होगी। हिंदू आतंकवाद तथा भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों के जरिए हिंदुत्व को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। इस साजिश में संघ को लपेटने की कोशिशें हो रही हैं। राष्ट्र के समक्ष भ्रष्टाचार व सत्ता का दुरूपयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। देशवासियों को दिशा देनी होगी, ताकि वे इन प्रवृत्तियों का न केवल मुकाबला कर सकें, बल्कि इनके उन्मूलन में सामाजिक अभियान चलाकर हिस्सा लें।

उपभोक्तावाद के सब्जबाग में जनता को फंसाकर राष्ट्रवादी भावनाओं को हाशिए पर डालने की कोशिशों से निपटने, जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी ताकतों के सामने केंद्र सरकार के ढीले रवैये तथा भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री सहित कांगे्रस के शीर्ष नेतृत्व के मनमानेपन व गैरजिम्मेदारी भरे बयानों को जनता के बीच ले जाने का संकल्प लेकर संघ अपनी दरक रही जमीन को फिर से मजबूत करेगा।

भागवत ने कहा कि उपभोक्तावाद की चपेट में आने से अनैतिक व अवैध तरीकों से धन कमाने की लालसा बढ़ रही है। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा पद के दुरूपयोग की घटनाएं हर रोज सामने आ रही हैं। कालाधन जैसे मुद्दे पर केंद्र सरकार व कांग्रेस की चुप्पी लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत दे रही है। काला धन देश की अर्थव्यवस्था को चुनौती दे रहा है। इन सब से निपटने के लिए संघ तथा जनता को आगे आना होगा।

भागवत ने कहा कि 63 सालों से जम्मू कश्मीर को केंद्र द्वारा करोड़ों रूपए का अनुदान दिए जाने के बावजूद वहां अलगाववादी मानसिकता बढ़ ही रही है। मौजूदा केंद्र सरकार की ढीलेपन के कारण वहां स्थिति अराजक हो रही है। सीमापार से घुसपैठ जारी है। अलगाववादी ताकतों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। सरकार के रवैये से सुरक्षाबलों का मनोबल गिर रहा है। समय की मांग हैकि अलगाववादियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

Enable Google Transliteration.(To type in English, press Ctrl+g)