Monday , 28 September 2020
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पाकिस्तान जैसा असफल मुल्क अब नहीं चाहिए : गोलोक बिहारी राय

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राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच और स्पंदन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में प्रदेश की राजधानी भोपाल में “पाकिस्तान : कल, आज और कल” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया l राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महामंत्री गोलोक बिहारी राय का कहना है कि पिछले 70 सालों से हमने पाकिस्तान को मजबूत पड़ौसी के तौर पर खड़ा होते देखने की नीति अपनाई थी इसके बावजूद पाकिस्तान ने हर बार प्रतिफल के रूप में हमें घाव ही दिए। वह अपने ही नागरिकों को सुखी जीवन देने में असफल रहा है, इसकी वजह से कई प्रांतों में वहां के स्थानीय लोग अपनी अस्मिता के लिए लड़ रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम अपनी नीति बदलें और अपनी अस्मिता के लिए लड़ रहे स्थानीय लोगों को अपना नैतिक समर्थन दें। ये नीति यूरोपीय देशों की तरह सह अस्तित्व के भाव को मजबूत करेगी और दक्षिण पश्चिम एशिया में शांति और समृद्धि भी बढ़ाएगी। 
                   आज राजधानी के विश्व संवाद केन्द्र के सभाकक्षा में आयोजित एक संगोष्ठी में पाकिस्तान कल आज और कल विषय पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।संगोष्ठी का आयोजन स्पंदन के सहयोग से किया गया था। कार्यक्रम में प्रमुख वक्तव्य राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महामंत्री गोलोक बिहारी राय ने दिया। अध्यक्षता पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.के.राऊत ने की। विषय की प्रस्तावना अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और विदेश नीति के अध्येता डॉ. अरविंद तिवारी ने रखी। प्रसिद्ध विचारक रामेश्वर शुक्ल,कुसुमलता केडिया समेत कई अन्य गणमान्य लोगों ने भी इस संगोष्ठी में भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच की नवगठित भोपाल इकाई की भी घोषणा की गई। कार्यक्रम का संचालन देवांजन बोस ने और आभार प्रदर्शन आशुतोष ने किया।
                    संघ के वरिष्ठ प्रचारक गोलोक बिहारी राय ने कहा कि कुंभ के दौरान 14 फरवरी को जब पुलवामा हमले की  सूचना पहुंची तो कुंभ मेला परिसर के तमाम पंडालों में बैचेनी की लहर दौड़ गई थी। लाखों धर्मप्रेमी नागरिकों के बीच किसी राष्ट्रीय विषय पर विषाद की इस घटना को देखकर साफ समझा जा सकता है देश से जुड़े हर भारतीय की संवेदनाएं राष्ट्र के साथ किस गहराई से एकाकार हैं। इसी के बाद 14 मार्च को देश के कुछ चिंतकों ने फैसला किया कि अब वे और पाकिस्तान नहीं चाहेंगे। इसी चिंता ने नो मोर पाकिस्तान आंदोलन को जन्म दिया और अब देश में इस विषय पर जनमत तैयार किया जा रहा है कि हम पाकिस्तान जैसे असफल विचार को और समर्थन नहीं देंगे। जो लोग इस विचार के खिलाफ पाकिस्तान में ही रहकर संघर्ष कर रहे हैं हम उन्हें अपना नैतिक समर्थन देंगे। जिस तरह यूरोप के छोटे छोटे देश एक साथ रहकर विकास की ऊंचाईयां छूने में सफल हुए हैं उसी तरह हम भी दक्षिण एशिया के विकास में, अपने पड़ौसी बलूचों और अन्य नागरिकों को अपना नैतिक समर्थन देंगे। यह कार्य हम अपने अपने शहर में रहकर भी कर सकते हैं।
                 उन्होंने कहा कि जिस तरह बंगलादेश के लोगों ने सोचा कि हम बंगला भाषी हैं तो उर्दू भाषियों के अत्याचार क्यों सहें और इसी विचार ने एक नए देश को जन्म दे दिया। बंग्लादेश के लोगों ने मार्च 1971 में खुद को बंगला राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया था और 16 दिसंबर 1971 को बंगलादेश का एक नए देश के रूप में उदय हो गया था। भारत की सेना ने निश्चित रूप से इसमें बड़ी भूमिका निभाई थी लेकिन तब सूचना का तंत्र कमजोर हुआ करता था और मुक्तिवाहिनी के नेतृत्व में संग्राम लड़ रहे बंग्लादेशियों को इस संघर्ष की मंहगी कीमत चुकानी पड़ी थी। आज पूरी दुनिया के देश पाकिस्तान को आतंकवाद का जन्मदाता मानते हैं। पूरी दुनिया में कहीं भी आतंकवादी वारदातें होती हैं तो उनकी जड़ें पाकिस्तान में पाई जाती हैं। इस आपराधिक गतिविधियों में पूरा पाकिस्तान शामिल नहीं है। वहां के लोग इस नीति से असहमत हैं और कई प्रांतों में अपनी अस्मिता अलग स्थापित करने की लड़ाई चल रही है। पाकिस्तान के फौजी हुक्मरान उन्हें बंदूक के बल पर एक राष्ट्र के तले खड़े होने को मजबूर कर रहे हैं।ऐसे में वहां के समुदायों को अपनी पहचान स्थापित करना अधिक कठिन नहीं होगा।
                  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान शुरु से कई वैश्विक शक्तियों के हाथ का खिलौना बना रहा है। चीन ने सिल्क रूट के जरिए या अन्य अभियानों के माध्यम से पाकिस्तान को मंहगा कर्ज दे रखा है। जिसे चुकाना पाकिस्तान के बस की बात नहीं है। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में चीन के निवेशक पहुंच चुके हैं। कई पाकिस्तानियों ने तो अपने मकान केवल इसलिए खाली छोड़ रखे हैं कि वे उन्हें चीन से आने वाले लोगों को किराए पर दे सकेंगे। सिल्क रूट के हर दो तीन सौ किलोमीटर पर चीनी भाषा मंदारिन सिखाने वाले स्कूल खुल गए हैं। बडी़ संख्या में पाकिस्तानी लड़कियां चीनी रेडलाईट एरिया में भेजी गईं हैं। ऐसे में भारत को अपनी नीति बदलनी होगी और पाकिस्तान के उद्यमी समुदायों को उनकी अस्मिता स्थापित करने के अभियानों को अपना नैतिक समर्थन देना होगा।
               उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ही विश्व में ऐसा अनोखा देश है जहां की राष्ट्रीयता इस्लाम है। दुनिया का कोई देश धर्म को राष्ट्रीयता से जोड़कर नहीं देखता। यही वजह है कि धर्म की आड़ में पनपी अनैतिकता ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चौपट कर दी है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तानी दार्शनिक डॉ. अबरार ने तो इन हालात को देखकर कहा है कि वर्ष 2027 तक पाकिस्तान नाम की चिड़िया विलुप्त हो जाएगी। हमें अपनी वैश्विक यात्रा जारी रखना है इसके लिए पाकिस्तान का अब और न होना जरूरी है। भारत के पडौ़स में छोटे देश होंगे तो वे अपनी विकास यात्रा आसानी से जारी रख सकते हैं। पाकिस्तान जिस विचार पर अलग हुआ था उसकी असफलता छुपाने के लिए वहां के शासक गलतियों पर गलतियां किए जा रहे हैं जिससे समूचे दक्षिण एशिया की विकास यात्रा प्रभावित हो रही है।
          कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व पुलिस महानिदेशक एसके राऊत ने कहा कि पहले देश की राष्ट्रीय नीति गोपनीय रखी जाती थी लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच ने जिस तरह देश भर में जनसंवाद का आंदोलन छेड़ा उसके बाद अब देश की विदेश नीति में आम जनता के विचार भी सहयोगी साबित हो रहे हैं। चीन को लेकर सरकार की जो भी विदेश नीति हो पर देश में नागरिकता बोध का केन्द्र राष्ट्र बन जाने के बाद विदेशी माल का बहिष्कार करने का भाव तो जनता के बीच जागया ही जा सकता है। पाकिस्तान में लोग सफल राष्ट्र के रूप में खड़े होने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हमारा नैतिक समर्थन उन्हें भी सुखी बनाएगा और भारत की विकास यात्रा को भी ऊंचाईयों तक ले जाएगा। उन्होंने आव्हान किया कि ज्यादा से ज्यादा लोग राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच से जुड़ें और भारत को विश्व कल्याण के लिए नेतृत्व करने वाला देश बनाने में सहयोगी बनें।
चीथड़ों में लिपटी पाकिस्तान की अखंडता 2032 तक टुकड़ों टुकड़ों में विखरने की स्थिति में है। क्योंकि पाकिस्तान एक अस्थिर, भूख नंगा, विफल राष्ट्र अपने को साबित कर चुका है। चीन के कर्ज के जाल में फंसा पाक कभी भी चीन का गुलाम हो सकता है। विश्व में लोकतंत्र के समक्ष वह एक समस्या है। “No More Pakistan Movement” राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा संचालित कार्यक्रम का सीधा संदेश है कि आज के स्थिति में आतंकवाद, क्षेत्रीय विकास व वैश्विक शांति समृद्धि के लिए क्षेत्रीय पहचान के देशों का अभ्युदय होना ही अच्छा होगा। जो वर्षों से अपनी कौम की पहचान, स्वायत्तता व संप्रभुता के लिए संघर्षरत हैं। जो एक विवश, असफल व गिरवी पड़े राष्ट्र पाकिस्तान के अपेक्षा क्षेत्रीय समृद्धि व शांति के लिए निर्भीक फैसला ले सकते हैं। कठोर कदम उठा सकते हैं। 
पाक शुरू से हमला करते आया है आतंक फैलाते आया है 1948 से पुलवामा तक, 1965 कच्छ का रण, ससंद भवन, कारगिल 1999,  मुंबई , उरी पुलवामा हर बार पाकिस्तान  आतंकी हमले करता रहा है। वह सुधरने का नाम नही ले रहा है। अब हमें 70 वर्षों से चली आ रही मजबूत पाकिस्तान की नीति को त्यागना चाहिए। बल्कि उसे कड़े सबक सिखाना चाहिए। चीन- पाक संबंधों का चित्र बहुत ही साफ व स्पष्ट है।  चाइना और पाकिस्तान की गठजोड़ का कारण  भारत को हताहत करना है।  आज विश्व विरादरी में एक  गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है । चीन के विगत रवैये को देखते हुए आज विश्व व एशिया की सामरिक शक्तियों को यह डर भी उत्पन्न हो राह है कि कहीं चीन CPEC परियोजना के पूरा होने से पहले ही निकट भविष्य में पाकिस्तान को निगल सकता है। दूसरी तरफ क्षेत्रीय विकास में भारत का योगदान , अभिरुचि की चारों तरफ आशा व आकांक्षा की दृष्टि से देखी जा रही है। भारत की वैश्विक यात्रा जो *फ्रीडम कॉरिडोर, एशिया अफ्रीका ग्रोथ कैरिडोर, मोरे कंबोडिया ट्राइलैटेरल रोड, साउथ नार्थ ग्रोथ कैरिडोर, मेकांग गंगा KTM ग्रोथ कैरिडोर जो चीन के OBOR से भी बृहद और विश्वसनीय प्रोजेक्ट है उसे रोकने के लिए चीन पाकिस्तान को सहयोग कर भारत के अंदर अशांति व असुरक्षा फैलाकर भारत को कमजोर करने का प्रयत्न कर रहा है। जिसमें पाकिस्तान जो भूखा नंगा एक असफल राष्ट्र जो भारत विरोध के स्वर में खुलकर खेल खेल रहा है। बहुत सारे सामरिक रणनीतिक विशेषज्ञों का यह मत बन गया है कि *पाकिस्तान 2032 तक स्वतः अलगाववाद के कारण ही विलीन हो जाएगा और यह बात हम भारतीय नहीं बल्कि उन्हीं के मुल्क के लोग  प्रसिद्ध दार्शनिक डॉ असरार अहमद, जो वहां की दूषित राजनीति और लालची पन्ना से परेशान थे , उन्होंने की है। उनकी भविष्य वाणी का अर्द्ध सत्य यदि बांग्लादेश के बनना, उदय है तो शेष आधा सत्य भविष्य की गोद में छिपा है। जो ठीक समय पर सामने जग जाहिर हो जाएगा। इसके लिए हम भारत के 130 करोड़ लोग बलूचिस्तान, सिन्धुदेश, महाजिरस्तान, पस्तूनिस्तान, वलवारिस्तान आदि  क्षेत्रीय स्मिताएँ जो अपनी पहचान के लिए संघर्षरत हैं, उनको मात्र अपना नैतिक समर्थन प्रदान करें।*  * आज वैश्विक शक्ति संतुलन व अपनी सामरिक दृष्टकोण आधार पर आज यही यथार्थ है कि *वैश्विक शान्ति व क्षेत्रीय शान्ति, विकास  के लिए पाकिस्तान का न होना ही आवश्यक है।* *भारत का उभरता हुआ  सामरिक रणनीति, वैश्विक व क्षेत्रीय शक्ति संतुलन तथा विभिन्न भविष्यवाणियों एवम  साक्ष्यों के यथार्थ का विश्लेषण कर यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान का विघटन या विलोप का आधा सत्य 1971 बांग्लादेश का अभ्युदय रहा, तो आधा सत्य 2032 तक वलरिस्तान, सिन्धुदेश, महाजिरस्तान, पंजबिस्तान, बलूचिस्तान, तालिबनिस्तान, पस्तूनिस्तान, व शारदापीठ अँचल ( उदभण्डा) जैसी क्षेत्रीय स्मिता के पहचान की प्राप्ति के साथ पूर्ण होगा।* 1947 के 24 वर्ष बाद पूर्वी पाकिस्तान 1971 मेंबांग्लादेश बन गया तो   1971 से आज 48 वर्ष बाद  पश्चिमी पाकिस्तान, आज का पाकिस्तान के अन्दर अनेकानेक संप्रभुत्व सम्पन्न  राष्ट्रों में विखरने की प्रक्रिया तेजी से शुरू हो चुकी है। आज की समसामयिक परिस्थितियों में यह स्पष्ट कहा जा सकता है कि  चीथड़ों में लिपटी पाकिस्तान की अखंडता 2032 तक टुकड़ों टुकड़ों में विखर जाएगा। और *बलूचिस्तान, महाजिरस्तान, सिन्धुदेश, पस्तुनिस्तान, पंजबिस्तान, वलवारिस्तान, शारदापीठ अँचल व भारत सहित अन्य क्षेत्रीय देशों को मिलाकर “भारतीय परिसंघ” का उदय ही क्षेत्रीय शान्ति तथा विकास की गारण्टी देगा। साथ ही  विश्व भी आतंकवाद से निजाद पायेगा तथा मानवता सुरक्षित होगी।*
बलूच और पश्तून, सिंध और महाजिर के लोग 1948 से ही अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए पाकिस्तान से संघर्षरत है।इस्लामिक कट्टरता से बना पाकिस्तान अब इस थेओरी पर संगठित नही रह पाएगा क्योंकि इस्लामिक कट्टरता  पर भाषाई कट्टरता भी हावी स्थापित हो गयी  है। बांग्लादेश का निर्माण इस बात को प्रामाणित करता है।
भारत का वर्तमान में वैश्विक यात्रा सम्पूर्ण विस्व मे किसी से छिपी नही है,भारत मध्य एशिया, पूर्वी एशिया के क्षेत्र में अपनी आभामयी उपस्थिति का एहसास  करा रहा है और भारत के इस कदम से छोटे छोटे अनेक राष्ट्र  अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए भारत की तरफ आशा भरी दृष्टि से भी देख रहे है क्योंकि वर्तमान में चीन की विस्तारवादी सोच और पाकिस्तान की आतंकवादी घटनाये समस्त हिन्द महासागरीय परिक्षेत्र मे अनेक छोटे छोटे राष्ट्रों के संप्रभुता के लिए खतरा बनती जा रही है।चीन अपनी औपनिवेशिक सोच को उद्योग के नाम पर बढ़ाता चला जा रहा है। OBOR परियोजना CPED परियोजना इत्यादि के द्वारा  वह छोटे छोटे राष्ट्रों  को अपने कर्ज़ और ब्याज के अधिकता मे दबा दे रहा है और उनकी ज़मीनों पर उद्योग केंद्र  विकसित करने कर नाम पर और उनकी सुरक्षा के नाम पर PLA को भी रखने की कोशिश की है। यद्यपि भारत भी इसका जवाब चाबहार परियोजना , कंबोडिया , म्यांमार में ट्राई लैटरल रोड  योजना तथा अनेक एशियाई देशो मे अपनी आर्थिक योजनाओ के विस्तारीकरण से दे रहा है। भारत ने बालकोट में पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार करके एयर स्ट्राइक करके अपनी ताकत भी विश्व पटल पर प्रस्तुत कर प्रत्यक्ष दर्शन करा चुका है। जिससे सम्पूर्ण विश्व मे भारत की महत्ता तथा शक्ति का एहसास भी विश्व को महसूस हो रहा है।
                        भारत की वैश्विक यात्रा का इतिहास  रघुकुल काल से प्रारम्भ कर पूरे विस्व मे भारत का परचम त्रेता युग से ही लहराता रहा है । यद्यपि बारहवीं शताब्दी में यह आभा कुछ कम हुई परंतु अब भारत पुनः अपनी आभा को पुनर्स्थापित कर रहा है। भारत के 130 करोड़ लोगों की इच्छा आकांक्षा –  वर्तमान में विश्व की शान्ति के लिए पाकिस्तान का नही रहना आवश्यक है और इसके लिए बस हमे अपने राष्ट्र द्वारा तन मन धन से नैतिक समर्थन देने की जरूरत है। वर्त्तमान में पाकिस्तान में रहने वालों लोगो की अत्यंत बुरी दशा है।पाक अधिकृत कश्मीर में मानवता नाम की वस्तु नहीं है। बलोच, पख्तून, वालारिस्तानी, मीरपुरिया,  सिंधी लोगों पर पाकिस्तान की आर्मी और आतंकवादियों का कहर बदस्तूर जारी है । वहां के लोग पाकिस्तान की नागरिकता को अस्वीकार करना चाहते हैं। अतः इस स्थिति में पाकिस्तान जल्द ही विश्व के पटल से समाप्त होने की स्थिति में है। बस हमें अपने मुल्क के 130 करोड़ देशवासियों का नैतिक समर्थन व संयोग की आवश्यकता है। इसके साथ ही साथ वर्तमान में हमारे देश के अंदर रहे गद्दारों को पहचान कर उनके मंसूबों को विफल करना होगा साथ ही पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देना होगा।

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