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Wednesday , 9 June 2021
समाचार

समाज को श्रेष्ठता की ओर ले जाने का प्रयास करें पत्रकार : श्री विवेक अग्निहोत्री

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विश्व संवाद केंद्र की ओर से देवर्षि नारद जयंती कार्यक्रम का आयोजन, देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार एवं सम्मान की घोषणा

इस वर्ष इन पत्रकारों को मिला सम्मान एवं पुरस्कार :

(बाएं से ) श्री प्रकाश हिन्दुस्तानी, सुश्री अंजली राय, श्री राहुल शर्मा और श्री श्रीकांत त्रिपाठी

विश्व संवाद केंद्र, मध्यप्रदेश की ओर से पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिये प्रतिवर्ष दिए जाने वाले ‘देवर्षि नारद पत्रकारिता सार्थक जीवन सम्मान-2020’ से वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रकाश हिन्दुस्तानी को सम्मानित किया गया। जबकि सकारात्मक रिपोर्टिंग के लिये दिए जाने वाले ‘देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार-2020’ के लिये पत्रकार सुश्री अंजली राय, श्री राहुल शर्मा और श्री श्रीकांत त्रिपाठी के समाचारों का चयन किया गया। 

भोपाल. समाज के उत्थान में पत्रकार और पत्रकारिता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। समाज में क्या श्रेष्ठ है और क्या नहीं, पत्रकारों को इस अंतर को निरंतर प्रस्तुत करते रहना चाहिए। ताकि समाज श्रेष्ठता की ओर बढ़ सके। देवर्षि नारद भारतीय पत्रकारिता के प्रेरणास्रोत हैं। हम उनके जीवन से नैतिकता, सत्य निष्ठता, निष्पक्षता, लोक कल्याण में संवाद की कुशलता सीख सकते हैं। यह विचार प्रख्यात फिल्मकार श्री विवेक अग्निहोत्री ने देवर्षि नारद जयंती के प्रसंग पर आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन विश्व संवाद केंद्र मध्यप्रदेश ने किया। इस कार्यक्रम का प्रसारण केंद्र के फेसबुक पेज और यूटूब चैनल पर किया गया। इस अवसर पर प्रतिवर्ष दिए जाने वाले देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार और सम्मान की घोषणा भी ऑनलाइन की गई।

श्री अग्निहोत्री ने कहा कि कोरोना के इस संकट काल में पत्रकारों को सकारात्मक समाचार भी समाज के सामने लाने चाहिए, ताकि लोगों की हिम्मत बढ़े। जब भी देश में विपदा आई है, पत्रकारिता ने सकारात्मक संवाद से लोगों की हिम्मत बढ़ाने का काम किया है। जब लोगों का हौसला मजबूत होता है तो वे बड़ी से बड़ी विपदा को भी परास्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गाँधी और विनोबा भावे सहित हमारे लगभग सभी स्वतंत्रता सेनानियों ने समाज जागरण के लिये पत्रकारिता को माध्यम बनाया। आज भी हमें अपने इन पुरखों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के माध्यम से ऐसी कोई बात समाज में नहीं जानी चाहिए, जिससे समाज का नुकसान होता हो।

षड़यंत्रपूर्वक भारतीय प्रतीकों को विकृत किया गया :

फिल्मकर श्री अग्निहोत्री ने कहा कि फिल्मों एवं अन्य माध्यमों में नारद मुनि ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के अन्य प्रतीकों को भी विकृत रूप में प्रस्तुत करने का षड़यंत्र वर्षों तक चला है। यह सब चाइना, कम्युनिस्ट, अर्बन-नक्सल और कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों की फंडिंग के द्वारा चलता रहा है, आज भी चलता है। हमें डटकर इसका विरोध करना चाहिए। नारद मुनि इधर की बात उधर करने वाले नहीं थे, बल्कि उनका सारा संवाद लोकहित के लिये है। वे तो समाज को जोड़ने का काम करते हैं।

पत्रकारिता प्रोडक्ट नहीं, चौथा स्तम्भ है :

श्री अग्निहोत्री ने कहा कि भारत में कुछ लोगों ने पत्रकरिता का स्वरूप बिगड़ दिया है। उसे ग्लैमरस कर दिया है। उन लोगों ने पत्रकारिता में खबरों की जगह गोसिप्स को बढ़ावा दिया है। वे समाचार पत्र को एक प्रोडक्ट मानते हैं, जबकि पत्रकारिता तो लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। समाचार पत्र को प्रोडक्ट मानने वाली सोच ने ही पत्रकारिता का सर्वाधिक नुकसान किया है।

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