आयुर्वेद में भी है डायबिटीज का इलाज ,ट्राय करके देखें बहुत जल्दी शुगर हो जाएगी कंट्रोल

डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है, जिसका सामना लगभग हर कोई कर रहा है। शुगर लेवल कंट्रोल करने के लिए लोग दवा तो लेते ही हैं, लेकिन आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट के जरिए भी डायबिटीज पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के मुताबिक, डायबिटीज के इलाज के लिए आयुर्वेद एक शानदार तरीका है।

डायबिटीज एक पुरानी बीमारी है, जो तब होती है जब शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है और शरीर पर्याप्त इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस बीमारी को प्रबंधित करना मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं। मधुमेह के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के साथ जीवनशैली में कुछ बदलाव आपको अपने ब्लड शुगर लेवल को बनाए रखने और विनियमित करने में मदद कर सकते हैं। तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताते हैं आयुर्वेद में डायबिटीज का इलाज कैसे किया जा सकता है।

​मधुमेह और आयुर्वेदिक दोष-

मधुमेह दुनिया में सबसे आम बीमारियों में से एक है। इसके अधिकांश मामले आधुनिक जीवन के तनाव और आदतों के कारण होते हैं। आयुर्वेद में तीन तरह के दोष होते हैं। वात, पित्त और कफ। हर दोष के असंतुलन से स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं। इसी तरह डायबिटीज एक कफ दोष असंतुलन की समस्या है।

जब संतुलित आहार और जीवनशैली के साथ कफ का संतुलन नहीं बैठ पाता, तो डायबिटीज हो जाती है। जब कफ दोष असंतुलित हो जाए, और इसे कमजोर अग्रि के साथ जोड़ा जाए, तो यह मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है। इससे शरीर में शुगर लेवल में कमी आती है। एक व्यक्ति जिसे कफ दोष है, उसे ध्यान रखना चाहिए कि उसके भोजन और जीवनशैली में पर्याप्त वायु और अग्रि तत्व मौजूद हों।

आयुर्वेद में मधुमेह के इलाज के लिए उपाय-

आंवला- आंवला सबसे शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। इसका उपयोग आयुर्वेद में विषाक्त पदार्थ को खत्म करने और ऊतकों को पोषण देने के लिए किया जाता है। यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से समृद्ध है। मधुमेह के इलाज और इसे नियंत्रण में रखने के लिए एकदम सही है। इसमें क्रोमियम, कैल्शियम, फास्फोरस और आयरन पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो शरीर में इंसुलिन को अवशोषित करने और ब्लड शुगर लेवल को निंयत्रित करने में मदद करते हैं।

त्रिफला-यह आयुर्वेदिक मिश्रण एक इम्यूनिटी बूस्टर है और पाचन के लिए भी बहुत अच्छा है। शुगर के रोगियों के लिए ये एक आयुर्वेदिक दवा है। इसमें पाए जाने वाले तत्व ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने में मददगार हैं। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण शरीर के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करती है।

दालचीनी-एक अन्य प्राकृतिक जड़ी-बूटी जो मधुमेह नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जाती है, वो है दालचीनी। यह अपने आप में ब्लड प्रेशर को कम करने और डायबिटीज से लडऩे में मदद करने के लिए जानी जाती है। भोजन के बाद ब्लड शुगर में कमी और आपकी इंसुलिन संवेदनशीलता को भी बढ़ाती है। इसके अलावा यह एक कार्डियो टॉनिक भी है जो हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त रोगियों और आयुर्वेद में डायबिटीज के उपचार में मददगार है।

डायबिटीज को नियंत्रित करने के सरल आुयर्वेदिक उपाय-

ब्लड शुगर को नियंत्रण में लाने के लिए आयुर्वेद में कुटकी, पुनर्नवा, गुडची और शारदुनिका के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। रात को तांबे के बर्तन में एक कप पानी में ये मिश्रण मिलाएं और सुबह उठकर पी जाएं।

ताजे फल, सब्जी और कड़वे फल खा सकते हैं।

ब्लड शुगर को स्थिर करने के लिए सुबह खाली पेट गर्म हल्दी वाला पानी पीएं।

शुगर को नियंत्रित करने के लिए अदरक की चाय पीना भी एक प्राकृतिक तरीका है।

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