Thursday , 6 August 2020
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कोविड 19 महामारी : जीवन शैली बदलने का सबक

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अंकिता श्रीवास्तव

कोरोना की शुरुआत तो चीन में फैली एक बीमारी की तरह ही हुई। लेकिन धीरे धीरे ये पूरे विश्व की समस्या बन गया। इसमें कोई संशय नहीं है, की पूरे विश्व के लिए ये महामारी दुख, विषाद और मौत का दूसरा रूप बन गई। परन्तु यह बीमारी प्रकृति का अभिशाप होने के साथ साथ वरदान भी बनी है।
प्रकृति ने सजा तो दी है, पर उसके साथ साथ हमें जीवन का सबक भी सिखाया है। और समझाया है, हमारी गलतियों को, हम अपनी भौतिकवादी और स्वार्थी जीवनशैली में सबकुछ भूलते जा रहे हैं। हवा और पानी के साथ ही साथ हमारे विचार भी प्रदूषित होते जा रहे हैं। पता नहीं कितने पुण्यकर्मों के बाद मिला हुआ मनुष्य जीवन, लेकिन मनुष्यता का अभाव ही अभाव।
मैं मैं और बस मैं का जीवन जीते हुए, और “हम” को भूलते हुए हमलोग…..आज फिर कुछ जाग से उठे हैं, फिर मदद के हाथ आगे बढ़ रहे हैं, कभी लोगों को खाना देने के लिए तो कभी पैसे की मदद करने के लिए। हां कोरोना ने करुण को तो जगा दिया है, और फिर से शुद्ध हवा पानी और भोजन का महत्व भी समझा दिया है। और प्रकृति ने इंसान की अहंकार से भरी उस छोटी सोच को, की हम नेता हैं अभिनेता है, व्यवसायी हैं, बड़ी बड़ी नौकरी मैं हैं और हमारे बिना तो दुनिया चल ही नहीं सकती, को एक क्षण मैं ये समझा दिया है कि उनका अस्तित्व कुछ भी नहीं है, और जीवन कितना क्षणभंगुर है।
आज पेड़, पौधे, पशु,पक्षी हवा और पानी सबके लिए उल्लास का समय है, और मनुष्य के लिए ये सीखने का समय है कि प्रकृति ने जिस दिन अपनी सहनशक्ति को क्षण भर के लिए भी समाप्त कर दिया तो हमारा अस्तित्व ही मिट जाएगा। हम प्रकृति के साथ जो खिलवाड़ कर रहे हैं , वह प्रकृति की विवशता नहीं सहनशीलता है। और जिस दिन से हम उसके साथ सम्मान और सहभागिता से चलेंगे, शक्ति सामर्थ्य और मनुष्यता से भर जाएंगे।
यदि भारतवर्ष के संदर्भ में इस महामारी को देखा जाए
तो अन्य देशों की तुलना में हमारे देश में इस महामारी का प्रकोप कुछ कम ही हुआ है। क्योंकि हमारे देश के लोगों की रोगप्रतिरोधक क्षमता अन्य देशों के लोगों से अधिक है। भारतीय भोजन और जीवन शैली रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं।
भारतवासियों के लिए ये जागने का समय है। अपनी शक्ति सामर्थ्य और जीवन मूल्यों को पहचानने और स्वदेशी के मूलमंत्र पर चलने का समय, ना सिर्फ भोजन अपना हो बल्कि हर जरूरत का सामान हमारे देश का बना हो, इस वैश्विक समस्या मैं देश को समर्थ और सक्षम बनाने का समाधान छुपा है। और देश के कुशल नेतृत्व से अपेक्षित है कि इस संकट की घड़ी में भी वो देश के ये विकास कि अपार संभावनाओं को खोज निकालेंगे, परन्तु इसके लिए प्रत्येक देशवासी के सहयोग और समर्पण की आवश्यकता है।
तभी कोरोना संकट से समाधान बनेगा।

2 comments

  1. आदरणीय अंकिता श्रीवास्तव जी,
    बेहद रोचक व समाज के प्रति नई सोच पैदा करती आपकी लेखनी है|
    खूबसूरत

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