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Wednesday , 16 June 2021
समाचार

अत्रावली नगरी के दक्षिणमुखी हनुमान (हनुमान जयंती विशेष)

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अनुभव शाक्य 

दिन मंगलवार शाम का समय, मंदिर में लोगों की भीड़, , माइक पर रामायण की चौपाइयों की आवाज, किसी को भी मोहित कर सकती है। हम बात कर रहे हैं दिल्ली से 150 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के अतरौली शहर के हनुमान गढ़ी मंदिर की।

अलीगढ़ जिले का अतरौली शहर यूं तो ब्रज क्षेत्र में आता है। यहां के लोगों की भाषा में ब्रज भाषा की मिठास देखी जा सकती है। लेकिन इस शहर की खूबसूरती को यहां का प्राचीन हनुमान मंदिर ‘हनुमान गढ़ी’ और ज्यादा बड़ा देता है। इस मंदिर में हनुमान जी के साथ राम दरबार और महादेव की प्रतिमा भी है। कुछ साल पहले इस मंदिर में एक गौशाला का भी निर्माण किया गया।

आईआईटी के छात्र विशेष बताते हैं कि वे जब भी अतरौली आते हैं। तो मंदिर में जरूर आते हैं। यहां आकर उनको शांति मिलती है। यहां हर मंगलवार को सुंदरकांड होता है। मंगलवार और शनिवार को महाआरती का आयोजन किया जाता है। जिसमें सैकड़ों शहरवासी शामिल होते हैं। इसके अलावा हर साल हनुमान जयंती पर यहां अखंड रामायण के साथ विशेष पूजा होती है। जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।

हनुमान गढ़ी मंदिर अतरौली शहर के किनारे पाली रोड पर बना हुआ है। मंदिर के चारों ओर हरियाली है। मंदिर के मैन गेट पर गणेश जी की मूर्ति लगी हुई है। मंदिर परिसर में पार्क और कई पेड़-पौधे लगे हुए हैं। मंदिर में सेवा करने वाले कौशिक बताते हैं कि यहां उन्हें सेवा करना बड़ा अच्छा लगता है। उनके जैसे और भी कई लोग रोज मंदिर परिसर में साफ-सफाई करते हैं। मंदिर के सामने मां दुर्गा मंदिर बना हुआ है। हनुमान गढ़ी मंदिर के आसपास कई और मंदिर हैं जिसमें बड़ा महादेव मंदिर, शिव बगीचा मंदिर, आदि यहां के प्रसिद्ध मंदिर हैं।

मंदिर में रोज आने वाले वैभव ने बताया कि दिन भर की शहर के शोरगुल से दूर यहां उनको सुकून मिलता है। हिंदू धर्म में जितने भी देव वृक्ष ( जिन पेड़ों की पूजा की जाती है) माने जाते हैं। वे सभी यहां हैं। इस वजह से इस मंदिर का बहुत आध्यात्मिक महत्व है।

मंदिर के पास बने सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल के प्रधानाचार्य जगवीर सिंह ने बताया कि वे अपने स्कूल के नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत उस सत्र के पहले मंगलवार को हनुमान गढ़ी मंदिर में करते हैं। जिसमें स्कूल में पढ़ने वाले सभी छात्र और अध्यापक यहां आकर पूजा करते हैं। जगवीर सिंह का मानना है कि उनके स्कूल के छात्र हनुमान जी की कृपा से खूब तरक्की कर रहे हैं।

मंदिर का इतिहास

हनुमान गढ़ी मंदिर के पुजारी रमेश चंद्र पाठक ने बताया कि वे पिछले 40 सालों से मंदिर में सेवा कर रहे हैं। हनुमान गढ़ी का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ है। दरअसल इस शहर अतरौली का वास्तविक नाम ‘अत्रावली नगरी’ था। रामायण काल के अत्री ऋषि यहां आए थे। तब यहां लोग नहीं रहते थे और बड़े बड़े टीले हुआ करते थे। अत्री ऋषि ने यहां एक टीले पर बैठ कर तपस्या की।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि जिस टीले पर अत्री ऋषि ने तपस्या की थी। वहां अब हनुमान जी का मंदिर है। टीले पर होने के कारण ये मंदिर काफी ऊंचाई पर है। पुजारी के अनुसार यहां हनुमान जी का मंदिर लगभग 250 साल पुराना जबकि राम दरबार को बने 110 साल हो गए हैं। वैसे तो मंदिर की देख रेख पूरा समाज करता है। इसके अलावा मंदिर के प्रबंधन के लिए एक समिति भी है। फिलहाल मंदिर समिति के अध्यक्ष शहर के समाजसेवी झमन्न लाल हैं।

दक्षिणमुखी हनुमान का विशेष महत्व

हनुमानजी की जिस प्रतिमा का मुख दक्षिण दिशा की ओर होता है, वह हनुमानजी का दक्षिणमुखी स्वरूप है। दक्षिण दिशा काल यानी यमराज की दिशा मानी जाती है। हनुमानजी रुद्र यानी शिवजी के अवतार हैं, जो काल के नियंत्रक हैं। इसलिए दक्षिणामुखी हनुमान की पूजा करने पर मृत्यु भय और चिंताओं से मुक्ति मिलती है। मंदिर से जुड़े गौरव शर्मा बताते हैं कि इस मंदिर में हनुमान जी की दक्षिणमुखी मूर्ति है। जिसका हिन्दू धर्म में एक अलग महत्व होता है। दक्षिणमुखी हनुमान को संकट मोचन माना जाता है। गौरव ये मानते हैं कि इस शहर पर दक्षिणमुखी हनुमान की विशेष कृपा है।

प्रसाद

हर मंगलवार और शनिवार को यहां आसपास के लोग पूजा करने आते हैं। अधिकतर लोग यहां पर बूंदी या गुलदाना का प्रसाद चढ़ाते हैं। रंग बिरंगी गुलदाने की मिठास यहां आने वाले लोगों को मिलती है। मंदिर में सेवा करने वाले केसरी ने हमें बताया कि भक्त जो प्रसाद लेकर आते हैं उसका भोग भगवान को लगाया जाता है। इसके अलावा रोज दिन में तीन बार हनुमान जी को भोग लगाया जाता है।

पूजा पद्धति

हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में हनुमान के साथ भगवान राम और महादेव का मंदिर भी है। रामदरबार और हनुमान जी का मंदिर दूसरी मंजिल पर है। यहां लोग सबसे पहले राम दरबार के दर्शन करते हैं। उसके बाद हनुमान मंदिर पर हनुमान चालीसा पढ़कर और दीपक जलाकर पूजा की जाती है। यहां के स्थानीय ओमवीर ने हमें बताया कि यहां हनुमान जी को ‘हनुमान बाबा’ बोला जाता है।

गौशाला

हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में एक गौशाला भी है जिसमें लगभग 70 गाय हैं। इन गायों की सेवा मंदिर के पुजारी, मंदिर समिति के साथ साथ यहां आने वाले भक्त करते हैं। लोग यहां आकर गायों को गुड़ खिलाते हैं। इसके अलावा कई लोग खाने बनाते समय पहली रोटी यहां की गाय के लिए भेजते हैं।

गौशाला के देखभाल करने वाले राहुल शर्मा ने बताया कि इस गौशाला को बने लगभग 4 साल हो गए हैं। यहां गायों की सेवा करने के लिए तीन कर्मचारी भी रखे गए हैं।

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