Friday , 10 July 2020
समाचार

पाकिस्तान का क्रूर चेहरा बेनकाब, वजीरिस्तान (पश्तूनिस्तान) आन्दोलन को भारत का समर्थन

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पश्तून तहफूज मूवमेंट पर अंतरराष्ट्रीय वेबिनार

नई दिल्ली: फैन्स (फोरम फॉर अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्योरिटी ) की ओर से आज रविवार को वजीरिस्तान (पश्तून तहफूज मूवमेंट) के पहचान का संकट नामक विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में देश-विदेश के कई नामचीन हस्तियों ने हिस्सा लिया। इस वेबिनार के शुरुआती सत्र को संबोधित करते हुए फैन्स के राष्ट्रीय संरक्षक व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सदस्य श्री इंद्रेश कुमार जी ने पश्तून लोगों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि आज पाकिस्तान की करतूत पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है। पश्तून समुदाय के लोगों पर पाकिस्तान सरकार व पाक सेना की ओर से विगत कई दशकों से अनवरत अत्याचार किए जा रहे हैं। वहीं, पश्तून समुदाय के लोगों ने अब अपनी अस्मिता व पहचान को लेकर अपनी लड़ाई तेज कर दी है। पश्तून तहफूज मूवमेंट के तहत अब इस समुदाय के लोग कुर्बानियां देने के लिए तैयार हैं। समय के साथ अब पश्तूनों का यह आंदोलन पूरे सीमाई क्षेत्र में जोर पकड्ता जा रहा है। आज पाकिस्तान खुद भी आंतरिक तौर पर कई आंदोलनों से जूझ रहा है। यूं कहें कि पाकिस्तान आज कई आंदोलनों में विभाजित है और कई तरह का चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसीके मद्देनजर अब पाकिस्तान पश्तूनों के आंदोलन को दबाने व कुचलने में लगा है। अफगानिस्तान की सीमा से लेकर कश्मीर तक जितने भी पश्तून हैं, उन्हें तरह तरह की यातनाएं दी जा रही हैं। इस समुदाय की महिलाओं, युवाओं पर खासा जुल्म किया जा रहा है। इंद्रेश कुमार जी ने पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करते हुए कहा कि वहां की सरकार और सेना दोनों मिलकर पश्तून समाज के लोगों पर काफी बर्बरतापूर्ण कार्रवाई कर रही है। इनके मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है, बहू-बेटियों की इज्जत को तार तार किया जा रहा है। पाकिस्तान में इस समुदाय के लोगों पर अत्याचार की खबरें अब दुनिया के सामने आने लगी है।

उन्होंने कहा कि पश्तून लोग अब अपने मानवाधिकारों को लेकर पुरजोर ढंग से आवाज उठाने लगे हैं। पाकिस्तान सेना के जुल्मो-सितम को सहकर वे अब एकजुट होने शुरू हो गए हैं। बीते कई सालों में हजारों निर्दोष पश्तून लोगों को अपनी जान गंवानी पडी। इतिहास को देखें तो यह स्पष्ट है कि इस समुदाय का पाक सरकार ने जमकर दोहन व दुरुपयोग किया। ये पाक के हुक्मरानों के हाथों हमेशा छले गए। ऐसे में अब जहां-जहां उनके मानवाधिकार कुचले जा रहे हैं, हर भारतीय का कर्तव्य है कि उन्हें सहारा दें, उनकी आवाज को बल दें ताकि वे अपने मानवाधिकारों की रक्षा कर स्वतंत्र जीवन जीने में सक्षम हो सकें। और यह समय की जरूरत भी है कि पश्तूनों की आवाज बुलंद हो सके ताकि पाकिस्तानियों की बर्बरता से उन्हें निजात मिल सके। मौजूदा समय में पश्तून तहफूज आंदोलन यानी पीटीएम का प्रभाव कराची तक है और पीटीएम की यह पुरजोर मांग है कि एक सार्वभौम, स्वतन्त्र व स्वायत्त वजीरिस्तान का निर्माण हो। ज्ञात हो कि इस समय पाक सेना के लाखों जवान वजीरिस्तान के तहत आने वाले 13 क्षेत्रों में तैनात हैं और वहां रहने वाले जनजातियों पर आए दिन कहर बरपाते रहते हैं।

पाकिस्तान के इस क्रूर चेहरे को अब वैश्विक पटल पर उजागर किए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पश्तून आंदोलन की कुछ महत्वपूर्ण बातों को भी दुनिया के लिए जानना जरूरी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दुनिया भर में पश्तूनों को एकजुट होकर अपनी स्वायत्ता को लेकर संघर्ष जारी रखना चाहिए। इस समुदाय के सभी युवाओं को पश्तून अस्मिता के लिए साथ आना चाहिए। पाक के अत्याचार से पश्तूनों को बचाना जरूरी है और इन्हें काफिर कहना बिल्कुल गलत है। पाकिस्तान के अमानवीय व अत्याचारी चरित्र को विभिन्न प्रदर्शनों, मीडिया व सोशल मीडिया के जरिये उजागर करना चाहिए। पश्तूनों के आंदोलन को मानवता के समर्थक भारत की तरफ से साथ देने का साफ संदेश होना चाहिए।

फैन्स के जनरल सेक्रेट्री (संगठन महामंत्री)  श्री गोलोक बिहारी राय ने वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि पश्तूनों की अपनी अस्मिता का यह आंदोलन वित सात दशकों से चला आ रहा है। पश्तूनों की वर्तमान युवा पीढ़ी अपनी स्वतंत्रता और मानवाधिकार के मूल्यों को भलीभांति पहचान और समझ रही है। जिसका अर्थ मंसूर पश्तून के नेतृत्व में ‘ये जो गुंडागर्दी है, इसके पीछे वर्दी है‘ नारे के साथ पाकिस्तानी सेना को चुनौती देते हुए पूरा पश्तून समाज अपनी अस्मिात की रक्षा के लिए एक साथ खड़ा है। 2019 में 22 शहरों में एक साथ इसका हुआ शांतिमय प्रदर्शन इसका प्रत्यक्ष गवाह है। पश्तून समुदाय के लोग अपनी स्वतंत्रता को लेकर पाकिस्तान के अंदर आंदोलनरत है। इनका आंदोलन अब काफी जोर पकड़ चुका है। पाक सेना पश्तूनों पर बर्बर कार्रवाई करती रहती है लेकिन इस समुदाय की आवाज अब जोर पकड़ने लगी है। अपनी स्वतंत्रता को लेकर पश्तूनों के इस आंदालन को एक मजबूत आवाज व नैतिक समर्थन देना बेहद जरूरी है।

इसके उपरांत पश्तून तहफूज मूवमेंट, यूरोप के संस्थापक औरंगजेब खान ने वेबिनार में अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि पश्तूनों के दुख-दर्द को हिंदुस्तान बेहतर तरीके से समझता है। उन्होंने कहा कि पश्तूनों की आबादी का अधिकांश हिस्सा आज भी पाकिस्तान के क्षेत्र में ही रहता है। पाकिस्तान की सेना ने हमेशा से तालिबान को संरक्षण देकर पश्तूनों व दूसरे समुदायों को बर्बर तरीके से सताया। उन्हें लक्ष्य बनाकर यातनाएं दीं और कई जगहों पर विस्थापित भी किया। पाकिस्तान का असली चेहरा तब सामने आया जब दक्षिणी वजीरिस्तान में पश्तूनों पर कई तरह के जुल्म किए। पश्तून समुदाय के लोग पाक सरकार की ओर से प्रयोजित आतंकवाद से हमेशा पीड़ित रहे हैं। हमारीे मांग है कि पाकिस्तान अपने मूल संविधान का पालन करे ताकि पाक सेना की दहशतगर्दी पर लगाम लग सके। पश्तून समाज विशेषकर अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान के सीमाई क्षेत्रों में पीड़ित है और अपने अस्तित्व को लेकर संघर्षरत है। पाकिस्तान के जुल्म बेहिसाब हैं, लेकिन हमारा संघर्ष आज भी जारी है। पाक सेना की बर्बर कार्रवाई अब किसी से छिपी नहीं है और बेनकाब हो रही है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की मीडिया ने भी पश्तूनों की दुर्दशा और समस्याओं को हमेशा दरकिनार किया। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिका से मिलने वाले फंड का भी दुरुपयोग किया और पाक सेना से साजिश के तौर पर इससे आतंकवाद को बढ़ावा दिया। यानी पाकिस्तान ने अमेरिका को भी हमेशा झांसे में रखा।

वहीं, आईसीडब्ल्यूए के रिसर्च फेलो आशीष शुक्ला ने कहा कि पश्तून तहफूज मूवमेंट अब पश्तूनों की आवाज बन चुका है। पिछले तीन-चार सालों में यह आंदोलन परवान चढ़ने लगी है और इसकी आवाज दुनिया में सुनी जाने लगी है। पश्तून समुदाय की समस्याओं की तरफ न तो किसी सरकार और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन की ध्यान गया लेकिन अब इसे एक उचित मंच देने की दरकार है। पाक सेना इनके आंदोलन की दबाना और कुचलना चाहती है ताकि ये मामला अंतरराष्र्टीय स्तर पर सामने न आए। इसलिए पाक सेना की बर्बरता और जुल्म की दास्तां आए दिन सामने आती रहती है। जबकि पश्तून समुदाय केवल अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहा है।

प्रतीक जोशी (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी) लंदन ने पश्तूनों के संघर्ष पर विचार रखते हुए कहा कि काबुल से लेकर कश्मीर तक पाकिस्तान ने  छद्म युद्ध (प्राॅक्सी वार) छेड़ रखा है। जबकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी लचर स्थिति में है। बावजूद इसके वह पश्तूनों पर जुल्म करने से बाज नहीं आ रहा है। पश्तूनों का पाकिस्तान ने हमेशा से इस्तेमाल किया और इस बात का कई सालों के बाद इस समुदाय को अहसास हुआ। पिछले 10 सालों में वार ऑफ टेरर के नाम पर वजीरिस्तान में पश्तूनों पर जुल्म बढ़े और इस क्षेत्र में लाखों लोग बेघर हुए। पश्तून समुदाय के लोग कई मोर्चों पर प्रभावित हुए, जिसके बाद पश्तून तहफूज मूवमेंट के जरिये पाकिस्तान के हुक्मरानों के समक्ष आवाज उठाई जाने लगी। पाक सेना के जुल्मों के खिलाफ लोग भी एकजुट होने लगे हैं। पश्तूनों में अब काफी बदलाव देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पश्तून समुदाय भारत से एक भावनात्मक लगाव महसूस करता है। ऐसे में इस समुदाय की बदहाली की तरफ अब भारत को जरूर देखना चाहिए। वेबिनार को अन्य कई अंतराष्ट्रीय व राष्ट्रीय वक्ताओं ने भी संबोधित किया।

इस अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार का संचालन डा. एम. महताब आलम रिजवी ने किया l राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के अध्यक्ष जेनरल आर एन सिंह ने सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया l

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