Thursday , 6 August 2020
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चीन की विस्तारवादी प्रवृत्ति बड़ा खतरा, वैश्विक ताकतें एकजुट हों : इंद्रेश कुमार

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राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के वेबिनार में ”वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत की चुनौतियाँ और मुमकिन समाधान” विषय पर विमर्श

11 जुलाई, 2020 (शनिवार) को सायं 5 बजे से रात्रि 8 बजे बाद तक भारत के चीन से संबंधों पर केन्द्रित तरंग संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन हुआ । यह आयोजन राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा किया गया था । परिचर्चा का विषय – ”वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत की चुनौतियाँ और मुमकिन समाधान” था । राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महामंत्री (संगठन) श्री गोलोक बिहारी राय ने संगोष्ठी की भूमिका प्रस्तुत की ।  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य श्री इन्द्रेश कुमार ने  संगोष्ठी में प्रारंभिक उदबोधन दिया । संगोष्ठी में राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के अध्यक्ष ले. जे. (सेवानि.) आर. एन. सिंह ने चीन के साथ भारत के संबंधों का विश्लेषण किया, ले. जे. (सेवानि.) के. जे. सिंह ने चीनी विपदा के संदर्भ में  प्रतिक्रियात्मक विकल्पों पर अपनी बात रखी । वहीं,  किर्गिजस्तान  में भारत के राजदूत रहे Sri Phunchok Stobdan ने  चीनी सीमा और विशेषकर वास्तविक वियंत्रण रेखा पर भारत की चुनौतियों के बारे में विस्तार से बात की । विशेषज्ञ वक्ताओं और प्रतिभागियों के बीच प्रश्नोत्तर भी हुआ । श्री इन्द्रेश कुमार के पूर्णाहुति भाषण से संगोष्ठी का समापन हुआ ।  कार्यक्रम का संचालन डा. एम. महताब आलम रिजवी ने किया और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महासचिव श्री जसबीर सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (फोरम फॉर अवेयरनेस ऑफ नेशनल सिक्योरिटी ) की ओर से 11 जुलाई, 2020 (शनिवार) को चीन की विस्‍तारवादी नीति, वास्‍तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर वर्तमान स्थिति  और भारत के समक्ष चुनौतियों के सन्दर्भ में राष्ट्रीय संगोष्ठी (वेबिनार) का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के संरक्षक व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य श्री इंद्रेश कुमार ने कहा कि चीन की विस्तारवादी नीति अब किसी से छिपी हुई नहीं है। दुनिया के अधिकांश देश अब चीन की इस मंशा से वाकिफ हैं। एशिया महाक्षेत्र में बीते कुछ दशकों में चीन ने अपनी विस्‍तारवादी एजेंडे को जिस तरह बढ़ाया है और इसके लिए उसने जो दमनकारी नीति व आर्थिक प्रलोभन देने का जो जाल बुना है, वह अब पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गई है। चीन की विस्‍तारवादी नीति विश्व के लिए खतरनाक है। पड़ोसी देशों की सीमाओं पर निरंतर अतिक्रमण करना और विश्व में अशांति फैलाना चीन के विस्तारवादी, आसुरी और तानाशाही चरित्र को दर्शाता है। उन्‍होंने कहा कि यदि इसके खिलाफ अभी से सचेत होकर समुचित कदम नहीं उठाए तो चीन का विस्‍तारवाद केवल हिमालयी क्षेत्रों व भारत के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे विश्‍व के लिए हाहाकार वाला होगा। हो सकता है कि इससे भारत जैसे कुछ एशियाई देशों के समक्ष आने वाले सालों में काफी समस्याएं खडी हों, समय रहते इससे निपटने के लिए उपाय एवं उपचार कर लेना चाहिए।
श्री इन्द्रेश कुमार ने कहा कि राषट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम दूरगामी ही नहीं, बल्कि प्रभावी और परिणामकारी भी होने वाला है । उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन सिर्फ चाहरदीवारी है, बाकि सब कब्जा और विस्तारवाद है । उन्होंने सवाल किया – क्या चीन के इस कब्जे को दुनिया स्वीकार कर ले? चीन सोया हुआ अजगर है। वह सदैव अविश्वसनीय है । चीन पर जो भी विश्वास करेगा वह धोखा ही खायेगा । अनेक महापुरुषों का कहा सच सिद्ध हुआ है कि चीन का विस्तारवाद सिर्फ भारत या एशिया के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए हाहाकार वाला होगा । कोरोना वायरस के रूप में चीन ने दुनिया को तबाही और अधिनायकवाद का क्रूर चेहरा दिखा दिया है । इसलिए चीन का उपचार समय रहते योग्य रीति से कर लेना चाहिए ताकि मानवता बची रहे । प्राचीन काल से मलय देश और मलय सागर प्रचलन में रहा है, लेकिन चीन ने षड्यंत्रपूर्वक कुछ वर्षों से इसे दक्षिणी चीन सागर  कहना शुरू कर दिया है । इसे पुन: मलय सागर के नाम से प्रचलित करना
होगा ।
उन्‍होंने कहा कि भारत ने आज लद्दाख, लाहौल स्‍पीति में मजबूत रणनीति बनाई, हालांकि चीन ने इसका विरोध किया। गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच झड़प के दौरान एवं उससे पहले भी भारत सरकार की कूटनीति ने चीन को झकझोर कर रख दिया है। चीन को एलएसी पर हद में रहना चाहिए। इन हालातों में भारत की जनता को जागरुक होकर चीन का कड़ा विरोध करना चाहिए। आज भारत ने चीनी सेना कड़ा सबक सिखाया है, इसलिए दुनिया भी आज भारत के साथ है। चीन की ओर पेश की जा रही चुनौतियों के खिलाफ वैश्विक एकता जरूरी है। यह युदध की विभीषिका में न बदले, इसलिए चीन की हर हरकत पर लगाम लगाना जरूरी है।  इंद्रेश कुमार ने यह भी कहा कि चीन की गुलाम बनाने की प्रवृत्ति से विश्व को सजग रहने की जरूरत है। तिब्बत कभी चीन का भू-भाग नहीं था, लेकिन उसकी दमनकारी नीतियों के कारण समस्या उत्पन्न हुई है। चीन की साम्राज्यवादी व विस्तारवादी नीति के कारण ही तिब्बत गुलाम रहा। तिब्बत की स्वायत्तता व आजादी के लिए अब हमें और गंभीरता से पहल करनी होगी। उन्होंने कहा कि चीन लगातार साम्राज्यवादी नीतियों को अपनाते हुए अपने पड़ोसी देशों पर दबाव बनाता है और उनकी जमीनों पर कब्जा करता है। चीन ने अपनी सेनाओं, राजनीतिक व कूटनीति संशाधनों को इस विस्‍तारवादी खेल में संलिप्‍त कर रखा है। वह भारत पर भी इसी प्रकार का दबाव पिछले कई सालों से बनाता आ रहा है। मगर अब केंद्र में एक मजबूत सरकार (मोदी सरकार) होने के चलते रणनीतिक तौर पर स्थितियों में  काफी सकारात्‍मक बदलाव हुआ है। मोदी सरकार ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों को अब बदल दिया है, इसलिए भी चीन बौखला गया है।
दुनिया के आध्यात्मिक, कूटनीतिक, बौद्धिक और राजनीतिक शक्तियों को चीन के प्रति जागरुक और सतर्क रहने की जरूरत है । मानव जाति को चीनी गुलामी के शिकंजे से बचाने के लिए सारी दुनिया भारत की ओर देख रही है । भारत आज चीन के विरोध के बावजूद कांग्रेस काल की कमजोरियों को दूर कर रहा है । जिन जिन देशों के भूगोल को चीन ने बिगाड़ा है, उसे सुधारने का यह सही वक्त है ।
उन्होंने कहा कि आज का भारत, पाकिस्तान को सबक सिखाने के साथ-साथ चीन को भी कड़ा संदेश दे रहा है। लद्दाख के अलावा अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम में भी भारत का चीन के साथ सीमा विवाद चल रहा है। भारत जब अपनी सीमाओं की निगहबानी को मजूबत कर रहा है तो चीन की कुटिलता को कड़ी चुनौती मिलने लगी है। उन्होंने कहा कि चीन को ड्रैगन का नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि चीन के हाथ सदा खून से सने रहे हैं और निर्दोष लोगों का खून बहाना इसकी पुरानी आदत है। मानवीय जीवन प्रणाली में चीन का कभी विश्‍वास रहा ही नहीं है। उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत की एकता व अखंडता के लिए तिब्बत की आजादी जरूरी है। ऐसा होगा तो ही देश की सीमाएं पूरी तरह से सुरक्षित होंगी। आज चीन की विस्तारवादी नीतियों से पूरी दुनिया अवगत है। तिब्बत की आजादी को लेकर जनजागरण अब जोर पकड़ रहा रहा है। तिब्बत की आजादी से भारत को कई फायदे होंगे। पहला फायदा यह होगा कि सीमा पर शांति स्थापित हो जाएगी। इसके साथ ही ताइवान, हांगकांग में भी स्‍वतंत्रता बेहद जरूरी है। मौजूदा समय में वहां के अशांत हालात चीन की ही देन है। आज चीनी विस्‍तारवाद से मुक्‍त नेपाल, तिब्‍बत की जरूरत है। इसे जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए। हांगकांग के आंदोलन को भी समर्थन देने की जरूरत है। यदि हांगकांग की घटना पर दुनिया की ताकतें चुप रही तो यह संकट बढ़ेगा।
दक्षिण चीन सागर में भी चीन की आक्रामकता बढ़ती जा रही है। यहां चीन जबरन वियतनाम की समुद्री सीमा में घुसपैठ कर रहा है। इसी विस्‍तारवाद एवं साम्राज्‍यवाद की वजह वह जापान, वियतनाम, अमेरिका जैसे देशों से भिड़ रहा है एवं दुनिया को चुनौती दे रहा है। मलय सागर जिसे चीन षड्यंत्रपूर्वक दक्षिण चीन सागर कहता है, चीन की हरकतों पर लगाम बेहद जरूरी है। प्राचीन काल से मलय देश और मलय सागर प्रचलन में रहा है, लेकिन चीन ने षड्यंत्रपूर्वक कुछ वर्षों से इसे दक्षिणी चीन सागर  कहना शुरू कर दिया है । इसे पुन: मलय सागर के नाम से प्रचलित करना होगा । दक्षिण चीन सागर हर हाल में चीन के कब्‍जे से मुक्‍त होना चाहिए। इस क्षेत्र में चीन की कुटिल योजनाओं को विफल करने के लिए कूटनीतिक, राजनीतिक, आध्‍यात्मिक शक्तियों को पूरी तरह सावधान रहना चाहिए। दूसरों की जमीन हड़प कर अपना क्षेत्र विस्तार करना चीन की पुरानी नीति रही है. यही वजह से चीन का अपने तकरीबन सभी पड़ोसियों से सीमा विवाद है। यही नहीं, चीन का सीमा को लेकर जापान, रूस और वियतनाम से टकराव चल रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महामंत्री श्री गोलक बिहारी राय ने वेबिनार की भूमिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत द्वारा एक चीन की नीति को खारिज करने की आवश्यकता पर बल दिया l एक चीन की नीति को ख़ारिज करना ही चीन के विस्तरवाद का सही जवाब होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया के 18 देशों के साथ चीन का सीमा विवाद है । वर्तमान समय में चीन की सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति है । यह तनाव नया नहीं है । दुनिया को पता है कि चीन विस्तारवादी है । श्री राय ने कहा कि एक समय तिब्बत संप्रभु और स्वतंत्र था । सन 1783 में ईस्ट इंडिया कम्पनी और तिब्बत के बीच व्यापारिक वार्ता का प्रमाण है । इस वार्ता में चीन की कोई भूमिका नहीं थी । हम वसुधैवकुटुम्बकम को मानने वाले हैं । इस नाते दुनिया में कहीं भी मानवता के पक्ष में आवाज उठाना है और ऐसी मौलिक आवाजों को समर्थन देना हमारा दायित्व है । अब भारत चीन की आँख में आँख डालकर बात कर सकता है ।
Sri Phunchok Stobdan : लद्दाख में अब विकास की शुरुआत हुई है । लद्दाख के विकास के लिए सड़कें, पुल और अन्य अधोसंरचना विकास का काम हो रहा है । लद्दाख क्षेत्र इतना महत्वपूर्ण होने के बावजूद विकास से वंचित और उपेक्षित रहा है । इस क्षेत्र में होने वाले अधोसंरचनात्मक विकास को सैन्य दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए । ले. जे. (सेवानि.) के. जे. सिंह ने चीनी विपदा के संदर्भ में प्रतिक्रियात्मक विकल्पों पर अपनी बात रखी । उन्होंने कहा कि चीन के साथ मनोवैज्ञानिक लड़ाई है । चीन इसका कूटनीतिक लाभ ले रहा है । हमें भी चाणक्य नीति के आधार पर चीन के साथ पेश आना होगा ।
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के अध्यक्ष ले. जे. (सेवानि.) आर. एन. सिंह ने चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग के बारे में विस्तार से बताया है । उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट देशों के अलावा भारत पहला देश है जिसने चीन को एक राष्ट्र के रूप में मान्यता दी । चीन को संयुक्त राष्ट्र संघ में सदस्यता दिलाने में भारत की अहम् भूमिका रही, इसके बावजूद चीन ने भारत पर हमला किया और भारत की भूमि हडप ली ।  चीन हमें सदैव धोखा देता रहा है ।  हमें अक्साई चीन के मुद्दे पर और अधिक मुखर होने की आवश्यकता है ।
किर्गिजस्तान में भारत के राजदूत रहे Sri Phunchok Stobdan ने  चीनी सीमा और विशेषकर वास्तविक वियंत्रण रेखा पर भारत की चुनौतियों के बारे में विस्तार से बात की । उन्होंने कहा कि गत 70 वर्षों से चीन के विषय में खालीपन रहा है । चीन हमेशा कई प्रकार का गेम खेलता है । हमें तिब्बत से पहले और तिब्बत से ज्यादा लद्दाख को सम्हालना है । श्री स्तोब्दन ने कहा कि यह तथ्य देश और दुनिया को बताया जाना चाहिए कि कैलाश मानसरोवर लद्दाख का ही अंग है, जिसपर चीन ने कब्जा कर लिया है । लद्दाख ही भारत को दुनिया से जोड़ता है । भारत में दीर्घकालिक रणनीति का घोर अभाव रहा । अब हमें चीन के सम्बन्ध में दीर्घकालीन रणनीति पर चलना होगा । हम एक इंच जमीन नहीं छोड़ेंगे । लद्दाख में अब विकास की शुरुआत हुई है । लद्दाख के विकास के लिए सड़कें, पुल और अन्य अधोसंरचना विकास का काम हो रहा है । लद्दाख क्षेत्र इतना महत्वपूर्ण होने के बावजूद विकास से वंचित और उपेक्षित रहा है । इस क्षेत्र में होने वाले अधोसंरचनात्मक विकास को सैन्य दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए । यह भारत के व्यापारिक और व्यावसायिक वृद्धि के लिए है । हमें चीन से उसी की भाषा और शैली में निबटना पडेगा ।
National Webinar on *India’s Challenges at LAC and Possible Resolutions Moving Forward* 11 July 2020, Saturday 4:45 pm onwards | Organised by *Forum for Awareness of National Security (FANS)* 4:45 PM – 5:00 PM Joining the Webinar 5:00 PM – 5:05 PM Welcome and Introduction of Guests by Dr. M. Mahtab Alam Rizvi 5:05 PM – 5:25 PM Keynote Address by *Shri Indresh Kumar*, Chief Patron, FANS and National Executive Member, RSS Technical Session: 5:25 PM – 5:45 PM *Indo – China Relations: An Analysis* *Lt Gen (retd.) R N Singh*, PVSM, AVSM, SM, VSM 5:45 PM – 6:05 PM *India’s Challenges at LAC* *Ambassador P Stobdan* 6:05 PM – 6:25 PM *Chinese Misadventure – Response Options* *Lt Gen (retd.) K J Singh*, PVSM, AVSM & Bar 6:25 PM – 6:45 PM Question and Answer Session 6:45 PM – 7:05 PM Valedictory Address by *Shri Indresh Kumar, Chief Patron, FANS and National Executive Member, RSS* 7:05 PM – 7:10 PM: Vote of Thanks by *Shri Jasbir Singh*, National General Secretary, FANS Plate form: Cisco WebEx

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