Friday , 28 January 2022
समाचार

स्वास्थ्य नीति थोड़ी बेहतर बनाएं

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डा. वेद प्रताप वैदिक

National Mental Health Policy, in New Delhi
File Photo

सरकार ने अपनी नई स्वास्थ्य नीति की घोषणा कल संसद में कर दी लेकिन देश के खबरतंत्र ने उस पर कोई खास ध्यान नहीं दिया। मैं समझता हूं कि अगर भारत को हमें महाशक्ति बनाना है तो दो बुनियादी चीजों पर तुरंत ध्यान देना होगा। वे हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य! नई स्वास्थ्य नीति में इस बार दो बातें बड़ी अच्छी लगीं। एक तो सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्यों केंद्रों में आम लोगों को साधारण रोगों के लिए डाक्टरी सेवा और दवा मुफ्त मिलेगी। देश के सकल उत्पाद का लगभग 2.5 प्रतिशत पैसा याने लगभग तीन लाख करोड़ रुपया इस मद पर खर्च होगा। अभी सरकारी इलाज पर जो कुछ खर्च होता है, उससे यह डेढ़-दो गुना होगा। इसका फायदा देश के ग्रामीणों, गरीबों और पिछड़ों को मिलेगा। ये वे लोग हैं, जो अपने खून-पसीने से देश के लिए संपत्ति पैदा करते हैं लेकिन उनके पास अपना इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं होते। ऐसे लोगों की संख्या देश में लगभग 100 करोड़ है।

यदि सरकार जो कह रही है, वह उसने कर दिखाया तो देश में नागरिकों की औसत उम्र 67.2 वर्ष से बढ़कर 70 वर्ष हो जाएगी। उनकी कार्य-क्षमता दुगुनी हो सकती है। नवजात शिशुओं की मृत्यु दर घटेगी। दूसरी बात जो बहुत अच्छी है, वह यह कि एलोपेथी के साथ देश की पारंपरिक चिकित्सा-प्रणालियों पर काफी जोर दिया जाएगा। आयुर्वेद, योग, यूनानी, होम्योपेथी और प्राकृतिक चिकित्सा पर सरकार विशेष ध्यान दे तो ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा होगा और इलाज का खर्च भी घटेगा।

सबसे ज्यादा जरुरी यह है कि इन चिकित्सा-पद्धतियों में नए-नए वैज्ञानिक अनुसंधानों को प्रोत्साहित किया जाए। यदि देश में डाक्टरों की कमी पूरी करनी हो तो मेडिकल की पढ़ाई स्वभाषाओं में तुरंत शुरु की जानी चाहिए। आज देश में एक भी मेडिकल कालेज ऐसा नहीं है, जो हिंदी में पढ़ाता हो। सारी मेडिकल की पढ़ाई और इलाज वगैरह अंग्रेजी माध्यम से होते हैं। यही ठगी और लूटपाट का सबसे बड़ा कारण है।

स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्ढा की यह पहल प्रशंसनीय है कि उन्होंने कुछ बहुत मंहगी दवाओं के दाम बांध दिए हैं और ‘स्टेम’ भी सस्ते करवा दिए हैं। यदि नरेंद्र मोदी अपने को दमदार नेता समझते हों तो वे एक काम और करवा दें। सारे जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों के लिए यह अनिवार्य करवा दें कि उनका और उनके परिजनों का इलाज सरकारी अस्पतालों में ही होगा। देखिए, साल भर में ही ये अस्पताल निजी अस्पतालों से बेहतर सेवाएं देने लगेंगे।   नया इंडिया से साभार .

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