Monday , 26 October 2020
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राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नागरिकों का सैनिक प्रशिक्षण अनिवार्य हो

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राष्ट्रीय सुरक्षा : विचारधारा और सिद्धांतों का पुनरावलोकन विषय पर स्पंदन और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच का वेबिनार

भोपाल, 9 जुलाई। राष्ट्रीय सुरक्षा किसी भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब जरुरी है कि नागरिकों के लिए मिलिट्री ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी जाए । सुरक्षा, हिंदुत्व, राष्ट्रीयता जैसे विषय अकादमिक पाठ्यक्रमों में शामिल किये जाएँ । राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर गांधी, नेहरू, सुभाषचंद्र बोस, स्वातंत्र्यवीर सावरकर आदि महापुरुषों के विचारों पर खुल कर बहस होनी चाहिए । इन विषयों पर बौद्धिक और अकादमिक चुप्पी देश के लिए घातक है । ‘राष्ट्रीय सुरक्षा : विचारधारा और सिद्धांतों का पुनरावलोकन’ विषय पर स्पंदन संस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच द्वारा आयोजित वेबिनार में विद्वान् वक्ताओं ने यह बात रखी । वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उदय माहुरकर ने वेबिनार में मुख्य वक्तव्य दिया, जबकि वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया शिक्षक डा. राधेश्याम शुक्ल ने विषय प्रवर्तन किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महासचिव गोलोक बिहारी राय ने की ।कार्यक्रम का संचालन मीडिया चौपाल के संयोजक डा. अनिल सौमित्र ने की ।

श्री महुराकर ने अपने वक्तव्य में कहा कि सावरकर का मानना था कि भारत को विश्व गुरु बनने के लिए यहाँ की सेना का सशक्त होना आवश्यक है। गाँधीवादी अहिंसा से देश ने आजादी के पहले से आज तक बहुत कुछ खो दिया है, जिसकी देश को बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी है। सम्पूर्ण अहिंसा और हिन्दू मुस्लिम एकता की बातें हिंदुओं की कीमत पर की गयी है, जिसपर देश में अब ईमानदारी से चर्चा होनी चाहिए। 1925 से ही सावरकर को यह अंदेशा था कि अहिंसा और हिन्दू मुस्लिम एकता के नाम पर देश को बांट दिया जाएगा । अंततः वही हुआ। देश में आजादी के पहले सेना में हिंदुओं की कमी थी। द्वितीय विश्वयुद्ध में उन्होंने हिंदुओं को सेना में जाने का आह्वान किया। जिससे आजादी के समय सेना में हिन्दू सैनिकों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई और हमें देश के लिए मजबूत सेना मिली। उन्होंने कहा कि वर्तमान में असम, यूपी में सरकार का बदलना, धारा 370 का हटना, राम मंदिर का निराकरण होने से कट्टरवादी भड़क उठे है, जो शाहीनबाग में गांधी की तस्वीर लगाकर अहिंसा के नाम पर देशवासियों को ब्लैकमेल कर रहे हैं। भारत विभाजन, चाइना युद्ध के बाद चीन का जमीन में कब्ज़ा इन सबमें अब एक राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। उदय माहुरकर ने कहा कि देश की आजादी के बाद तत्कालीन सरकारों ने भारतीय आइडियोलॉजी को हाशिये पर रखने का काम किया। जबकि हिन्दू आइडियोलॉजी तब की है, जब दुनिया मे किसी दूसरे धर्म या सभ्यता अस्तित्व में नही आईं थी।

वेबिनार को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डा. राधेश्याम शुक्ल ने कहा कि देश के स्वतंत्र होने के बाद से ही देश की सुरक्षा की अलवेहना की गई। भारत के दोनों ओर दो इस्लामिक देश बना दिए गए और सीमाओं का निर्धारण भी नहीं हुआ। नेहरू ने देश में सेना को खत्म कर देने तक कि बात कही और पंचशील को लेकर दुनिया में चीन की वकालत कर रहे थे, उसे सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बना दिया। डा. शुक्ल ने कहा कि मोदी सरकार आने से पहले देश मे सुरक्षा को लेकर न कोई विचार था न सिद्धांत, अब सरकार ने देश के बाहरी खतरों के साथ भीतरी खतरों को पहचानना शुरू किया है। देश को मुख्य रूप से सांस्कृतिक खतरा है, जिससे लड़ने के लिए देश की जनता को आगे आना होगा। इस्लाम और कम्युनिस्ट जो देश की संस्कृति और सभ्यता को नष्ट कर रहे हैं, उससे देश की जनता को आगे बढ़कर सामना करना होगा तभी देश सुरक्षित रहेगा।

डॉ राधेश्याम शुक्ल ने  एक सवाल के जवाब में कहा कि मौजूदा समय में शिक्षा व्यवस्था राज्यों के आधीन होने से इसमें जहां विसंगतियां है। यदि यह व्यवस्था केंद्रीय कृत हो जाय, तो काफी एकरूपता लाई जा सकती है। भले ही इसके प्रबंधन संभालने का जिम्मा राज्यो को दे दिया जाय। इसके पहले उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर बोलते हुए कहा कि, राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठा सकती है, लेकिन सांस्कृतिक और धार्मिक सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज को उठाने की जरूरत है। वक्ताओं ने यहां पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को आड़े हाथ लिया और उसकी विदेशी और आंतरिक सुरक्षा नीति पर सवाल खड़े करते हुए बताया कि देश मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के आने के पहले सेना के पास सुरक्षा का कोई सिद्धान्त नही था। क्योंकि तब कांग्रेस की नीति हिंदुत्व को कमजोर करने की रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कृते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महासचिव गोलोक बिहारी राय ने कहा कि यह वेबिनार अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर उचित समय पर आयोजित हुआ है । इस आयोजन से राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मुद्दे पर समाज को काफी मदद मिलेगी । उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच वेबिनार के सुझावों और अनुशंसाओं को सरकार तक पहुंचाएगी और इसे पाठ्यक्रम में शामिल करने का आग्रह करेगी । इस आयोजन में मध्यप्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और फैन्स मप्र इकाई के अध्यक्ष एस. के. राउत, पूर्व कुलपति प्रो. प्रमोद वर्मा, फैन्स की राष्ट्रीय महासचिव रेशमा सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अक्षत शर्मा, भाजपा प्रवक्ता नीरू सिंह ज्ञानी, नेहा बग्गा, ग्लोबल सोशल नेटवर्क की अध्यक्ष रिचा सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. स्वदेश सिंह, प्रो. तरुण गर्ग, अभिषेक शर्मा, हर्षिता यादव, डा. कृपा शंकर चौबे, डा. आर एच. लता, सुमन शर्मा सहित सैकड़ों लोगों ने भागीदारी की ।

बेबीनार का संचालन मीडिया चौपाल के संयोजक और स्पंदन संस्था के सचिव डॉ अनिल सौमित्र ने किया। बेबीनार में  भाग ले रहे प्रतिभागियों ने देश की सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर वक्ताओं से सवाल भी पूछे । वेबिनार में बिहार, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान, गोवा, आंध्रप्रदेश आदि प्रदेशों सहित देश के विभिन्न हिस्सों से अध्येताओं, शोधार्थियों, प्राध्यापकों, पत्रकारों और कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की।

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