Wednesday , 5 August 2020
समाचार

पख्तून : आज़ादी से अब तक!

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हर्षिता यादव*
पख्तून जो 1947 मे आज़ाद हो कर भी आज तक आज़ाद नही हुए, अपनी आजादी के लिए एक अनसुलझी लड़ाई लड़ रहे हैं
पख्तून परिचय-
पख्तून एक कबिलाई समाज हैं ,जिनका इतिहास 5 हज़ार साल पुराना हैं, एक ऐसा समुदाय जो बेहद सुंदर और नीली आंखों वाला है डील डोल आकर्षण पैदा करने वाला होता हैं l इस समुदाय को 2800 साल पहले ‘ बनी इजरायल’ के 10 कबीलों को देश से निकाला दे दिया था उन्ही मे से ये एक है ” ऋग्वेद” के चौथे खंड के 44  वे श्लोक मे भी पख्तून का वर्णन ‘ पक्त्याकय’ नाम से मिलता हैं, इसी तरह तीसरे खंड के 91 वाँ श्लोक अफरीदी क़ाबिले का जिक्र ” आपर्यतय” के नाम से है l इन्हें पठान, अफगान, अफरीदी भी बोलते हैं, मूलतः इनकी आबादी 50 मिलियन हैं जिनमे से ये भारत, पाकिस्तान, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब मे बसे हुए है, मूलतः ये यहूदी हैं जो इजरायल से निष्कासित है जिसका ज़िक्र अलेजेंडेर बर्न्स ने 1837 मे किया है और लिखा भी हैं, 1.7 मिलियन अफ़ग़ान रिफ्यूजी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान मे रहते है l
आज़ादी मे योगदान-
पख्तून के नेता ख़ान अब्दुल ग़फ़्फ़ार खान एक महान नेता थे जिन्हें ” सीमांत गांधी” बादशाह खान जो कि अहिंसा के प्रबल समर्थक थे, और आज़ादी मे देश के विभाजन के खिलाफ थे,पर ब्रिटिश गवर्मेंट और उस समय के समकालीन नेताओ ने उनकी एक नही सुनी और देश के टुकड़े कर दिए उसके बाद वो पाकिस्तान चले गए जहाँ लगातार पख्तून समाज के अधिकारों के लिए लड़ते रहे पर उन्हें अधिकार नही दिलवा पाए 20 जनवरी 1988 मे पेशावर मे ही उन्ही के घर मे नज़रबंद कर के उन्हें मार दिया गया l बिल्कुल उसी तरह 1930 मे 100 पख्तून की हत्या कर दी गई आज़ादी के नाम पर l
पाकिस्तान की बर्बरता-
पाकिस्तान मे किसी और क़ाबिले को कभी वो हक़ नही दिए जाते जो वहाँ के आम नागरिक को प्राप्त होते है अन्य समुदाय को कुचला जाता है, आज भी 47 के बाद से पख्तून की स्थिति मे कोई सुधार नही हुआ है, पाकिस्तान मे पख़्तून लगातार अपनी पहचान के लिए आंदोलन कर रहे हैं, जबकि पख़्तून समुदाय को पाकिस्तान सरकार ने बैन किया हुआ है, जबकि हुक्मरान इमरान खान भी इसी समुदाय से है, तालिवान आतंकवाद को खत्म करने की आड़ मे पख़्तून पर अत्याचार किये जाते हैं, इनकी बस्ती को तबाह किया गया, औरतों की इज़्ज़त लूटी गई मासूमो को कत्ल कर दिया गया पाकिस्तान मिल्ट्री लगातार इन पर अत्याचार करती रहती हैं, विगत 10 सालो मे पख़्तून युवा फिर आवाज़ उठा रहे है उनकी मांग हैं कि अफ़ग़ान सीमा से लगे कबायली इलाक़ो मे अंग्रेजों के दौर का काला कानून ख़त्म कर वहाँ भी पाकिस्तानी संविधान लागू कर वो बुनियादी हक़ दिए जाएं जो लाहौर, करांची, इस्लामाबाद के नागरिकों को हासिल है युवा नेता मंजूर पशतीन ने 2014 से पशतुन तहफ़्फ़ुज़ मूवमेंट की शुरुआत की हुई हैं जिससे युवा जुड़ते जा रहे है और पाकिस्तान सरकार की नाक मे दम किये हुए हैं, आने वाले सालो मे पाकिस्तान की तहरीक को बदलने मे सफल भी हो जाये l
*लेखिका मोटिवेशनल काउंसलर हैं l

One comment

  1. अभय कुमार सिंह

    बहुत बढिया जानकारी दी है इस विषय पे

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