Friday , 28 January 2022
समाचार

मध्यप्रदेश में फाँसी के कानून के लिए चलेगा हस्ताक्षर अभियान

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मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के महिला संगठनों से आग्रह किया है कि वे बेटियों के साथ ज्यादती करने वाले नर पिशाचों को फाँसी देने वाले कानून के पक्ष में सभी जिलों में हस्ताक्षर अभियान चलाकर कानून के पक्ष में वातावरण का निर्माण करें ताकि पूरे देश को इसका लाभ मिले। मुख्यमंत्री आज यहाँ भाजपा के राज्य महिला मोर्चा द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। ये महिलाएँ बेटियों की गरिमा की रक्षा के लिये बनाये गये क्रांतिकारी कानून बनाने और महिलाओं-बेटियों के सशक्तीकरण के लिये मुख्यमंत्री श्री चौहान के समर्पण का अभिनंदन करने के लिये एकत्रित हुईं थीं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं और मोर्चे की पदाधिकारी महिलाओं से कहा कि यह अभिनंदन का नहीं बल्कि बेटियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने विशाल संख्या में उपस्थित महिलाओं को बेटियों की रक्षा और सम्मान में आगे बढ़कर जन-जागरण अभियान का नेतृत्व करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटियों और महिलाओं के प्रति कुत्सित पुरुष प्रधान मानसिकता को बदलने के लिये व्यापक अभियान चलाने की आवश्यकता है। महिला शक्ति को जागृत होना पड़ेगा और समाज को अपनी शक्ति का अनुभव कराना होगा।

महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की निगरानी के लिये अलग एडीजी

श्री चौहान ने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर निगरानी रखने के लिये अलग से एडीजी की नियुक्ति की जायेगी। साथ ही चार आईजी भी उनके सहयोग के लिये होंगे। वे महिलाओं से संबंधित अपराधों पर सतत् निगरानी रखेंगे। श्री चौहान ने बताया कि 19 दिसम्बर से आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा स्थापित करने के लिये और प्रदेश के कोने-कोने से धातु और मिट्टी एकत्र करने के लिये एकात्म यात्रा प्रारंभ हो रही है। इसमें शामिल होने वाले संत-महात्मा  भी यात्रा के साथ बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश समाज को देंगे। उन्होंने कहा कि बेटियों पर बुरी नजर रखने वाले के लिये सरकार ने फाँसी जैसी कठोर सजा का प्रावधान किया है, लेकिन समाज को मिलकर पुरुष प्रधान मानसिकता को बदलना होगा कि महिलाएँ सिर्फ उपभोग करने वाली वस्तु है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी जिलों में महिला स्व-सहायता समूहों और शौर्या दलों को यह जिम्मेदारी दी जायेगी कि वे बेटियों के प्रति घृणित मानसिकता रखने वालों पर निगरानी रखें और ऐसे लोगों के चरित्र के बारे में संबंधित पुलिस प्रशासन को अवगत करायें। उन्होंने कहा कि हर जिले में महिलाओं, प्रबुद्ध नागरिकों, जन-प्रतिनिधि, मीडिया प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त सम्मेलन किये जायेंगे जिनमें महिलाओं की रक्षा और सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर विचार होगा। इससे समाज में जागरूकता आयेगी।

श्री चौहान ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-8 मार्च को महिला अपराधों के विरुद्ध संकल्प की अभिव्यक्ति स्वरूप संगठन बनाने की पहल की जायेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से महिलाओं के सम्मान में सभी जरूरी कदम उठाये जायेंगे। हर जिले में वन स्टॉप हेल्प सेंटर बनाये जायेंगे। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिये जायेंगे कि वे महिला छात्रावासों, स्कूल-कॉलेजों, कोचिंग केन्द्रों और अन्य कार्य-स्थलों में नियमित रूप से भ्रमण करें और बेटियों की समस्याओं के संबंध में चर्चा करें ताकि पहले से प्रतिबंधात्मक उपाय किये जा सके। उन्होंने कहा कि बेटियों को लाने-ले-जाने वाली बसों में महिला कंडक्टर नियुक्त किये जायेंगे। छात्रावासों में प्रवेश द्वार पर सीसीटीव्ही कैमरे लगाये जायेंगे। महिला छात्रावासों में स्वीपर महिलाओं और खाना बनाने वाली महिलाएँ रखी जायेंगी। स्कूलों में आत्म-रक्षा का प्रशिक्षण दिया जायेगा। बसों में जीपीएस सिस्टम और सीसीटीव्ही लगाये जायेंगे। बेटियों को जागरूक किया जायेगा।

महिला सशक्तीकरण से ही देश सशक्त बनेगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में बेटियों के प्रति घृणित मानसिकता का बढ़ना समाज के लिये खतरनाक है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण से ही देश सशक्त बनेगा। राज्य में बेटियों को अधिकार संपन्न बनाने और उनके जन्म को उत्सव बनाने के लिये कई उपाय किये गये हैं। स्थानीय निकायों में पचास प्रतिशत आरक्षण दिया गया है इससे ज्यादा संख्या में वे चुनकर आईं है और पूरी प्रतिभा और क्षमता के साथ स्थानीय सरकार चला रही हैं। श्री चौहान ने कहा कि महिलाओं के स्व-सहायता समूहों के परिसंघ को पौष्टिक पोषण आहार बनाने की फेक्ट्री चलाने की जिम्मेदारी दी जायेगी। इसमें सरकार उनकी मदद करेगी। उनके द्वारा दिये जा रहे लोन की गारंटी भी सरकार ले सकती है। उन्हें स्कूल यूनीफार्म की सिलाई करने का भी काम सौंपा जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि महिलाओं की रक्षा और उनकी गरिमा का सम्मान बनाये रखने के लिये फाँसी जैसा कठोरतम दंड दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि इस पर पूरा देश विचार-विमर्श कर सकता है कि बेटियों की इज्जत से खेलने वालों को फाँसी देना चाहिए या नहीं। उन्होंने उपस्थित महिलाओं से पूछा तो सबने एक स्वर में फाँसी के कानून की वकालत की। श्री चौहान ने कहा कि मानव अधिकार सिर्फ मानवों के लिये होते हैं, दानवों के लिये नहीं। ऐसे नर-पिशाचों को जानवर कहना भी जानवर का अपमान होगा। श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश ने जो कानून पास किया है उससे नर-पिशाच अपराध करने से डरेंगे। यह कानून राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिये भेजा जा रहा है। इसी बीच कई जिलों में महिलाओं ने इस कानून के पक्ष में हस्ताक्षर अभियान चलाना शुरू कर दिया है। श्री चौहान ने छेड़छाड़ करने, शादी का झाँसा देकर त्याग देने जैसी घटनाओं के संबंध में कहा कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। अश्लील मेसेज देने और टिप्पणियाँ करने जैसे कृत्यों को भी गैर-जमानती अपराध माना गया है और कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के साथ मिलकर राष्ट्रपति से इस कानून को अनुमति देने की अपील की जायेगी। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को सामाजिक अभियान चलाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि पूरे समाज को ऐसे घृणित मानसिकता वाले नर-पिशाचों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।

इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री विनय सहस्त्रबुद्धे, भाजपा के राज्य अध्यक्ष श्री नंदकुमार सिंह चौहान, महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती कुसुम महदेले, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह, महिलाबाल विकास और अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती ललिता यादव, महिला मोर्चा की अध्यक्षा सुश्री लता एलकर, श्रीमती साधना सिंह, सांसद श्रीमती ज्योति धुर्वे, पूर्व महापौर श्रीमती कृष्णा गौर और विशाल संख्या में प्रदेश की महिलाएँ और बेटियाँ उपस्थित थीं।

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