Thursday , 6 August 2020
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25जुलाई1880 गणेशवासुदेव जोशी का निधन खादी और स्वदेशी का सबसे पहले प्रचार किया

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1857 की क्रान्ति की असफलता के बाद अंग्रेजों की आर्थिक कमर तोड़ने का फार्मूला सबसे पहले सुप्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गणेश वासुदेव जोशी ने प्रस्तुत किया था । उस समय अंग्रेज सारा रा-मेटेरियल भारत से ले जाते थे और अपने कारखानों में बना समान भारत में खपाते थे । दुनियाँ के हर देश में उनकी सत्ता की नीव व्यापार ही था । इसलिये गणेशजी जोशी ने सबसे पहले यह प्रचार किया कि यदि भारतीय फिर से अपने कुटीर उद्योगों पर जायें स्वदेशी अपनाये तो अंग्रेज स्वयं कमजोर हो जायेंगे
स्वदेशी का सबसे पहले दर्शन प्रस्तुत करने वाले गणेश वासुदेव जोशी का जन्म 9 अप्रैल 1828 को सतारा में हुआ था । उनके पिता हालांकि ईस्ट इंडिया कंपनी में ही काम करते थे पर गणेश जी आरंभ से ही अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ रहे उन्होंने 1857 में संदेश यहाँ से वहाँ पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
क्रांति की असफ़लता के बाद उन्हे कुछ देशी राजाओं की भूमिका पर निराशा हुई । इसलिए उन्होंने जन जागरण का निर्णय लिया और उन्होंने स्वदेशी का अभियान छेड़ा । इसके लिये उन्होंने 1870 में नागपुर को केन्द्र बनाया और 1872 विधिवत एक संस्था का गठन किया । गठन के लिये इस बैठक में न्यायधीश गोविन्द रानाडे भी उपस्थित थे । जोशी जी ने पूना, नागपुर, सतारा और बंबई आदि अनेक स्थानों पर निराश्रित परिवारों को जोड़ कर स्वदेशी वस्तुओं का उत्पादन शुरू कराया और विक्रय केन्द्र खोले । आज के खादी भंडार के बीज यही केन्द्र थे । आगे चलकर तिलक जी भी इसी संस्था से जुड़े और तिलक जी ने गाँधी जी को इस विचार से अवगत कराया

श्री रमेश शर्मा

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